सीवर लाइन डाल रहे पर गंदे पानी का हल नहीं खोजा
- यमुना प्राधिकरण भी ग्रेनो प्राधिकरण की राह पर.. अधिकारी बन रहे अंजान
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो प्राधिकरण अपने क्षेत्र के 124 गांवों में सीवर लाइन डालकर अधिकतर गांवों मेें इसे चालू नहीं कर पाया है। अब यमुना प्राधिकरण भी इसी राह पर चल रहा है। यहां सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है, पर अधिकारियों को यह पता नहीं है कि गंदा पानी कहां जाएगा। निर्माण करने वाले ठेकेदारों को भी इसकी कोई जानकारी नहीं है।
ग्रेनो में सीवर लाइन डालने के बाद अधिकारी अपना कमीशन और ठेकेदार भुगतान ले चुके हैं। मगर समस्या जस की तस है। 70 फीसदी गांवों में आज तक लाइन चालू नहीं हो पाईं। यहां दो दशक पहले बनी नालियों में ही गंदा पानी गांवों के आसपास जमा रहता है। वहीं इसी तरह की अव्यवस्था यमुना प्राधिकरण के अधिकारी बनाने में जुटे हैं। इन्होंने अपने क्षेत्र के पहले गांव जगनपुर में कई दिन पहले सीवर लाइन डालने के लिए अच्छी-खासी सड़क की खुदाई तो कर दी, लेकिन उसे बनाया नहीं है।
जब ग्रामीणों ने ठेकेदार से पूछा कि सीवर लाइन का पानी कहां जाएगा तो उसने कह दिया कि वह तो केवल लाइन डालने आए हैं, बाकी जिम्मेदारी अधिकारियों की है। ग्रामीण नरेंद्र भड़ाना ने बताया कि इसी तरह सीवर लाइन को डालने की गलत प्रक्रिया ग्रेनो प्राधिकरण के निकटवर्ती गांव मुरसदपुर में 15 साल पहले शुरू की गई थी। वहां लोग अभी तक परेशान हैं।
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खूब चला था कमीशन का खेल:
ग्रेटर नोएडा के गांवों में आरसीसी सड़कों को तोड़ कर सीवर लाइन डाली गई थीं। काम पूरा होने पर सड़कों को फिर से ठीक करने के लिए प्राधिकरण ने पैसा लगाया था। इसके बाद तीसरे चरण में फिर पानी की पाइप लाइन डालने के लिए ठेका छोड़ा गया और सड़क तोड़ दी गईं। फिर से प्राधिकरण ने सड़कों को बनवाया। इस तरह यहां सड़क निर्माण के नाम पर ही कमीशन का खेल चलता रहा।
प्राधिकरण गांव का पूरी तरह विकास करने की ओर बढ़ रहा है, सीवर लाइन की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण