साहिर साहब की एक पंक्ति है जो आज कि कहानी के नायक पर बिल्कुल सजग बैठती है 'आओ कि कोई ख्वाब बुने,कल के वास्ते' सभी के ख्वाब होते है परन्तु बहुत कम लोग उन ख्वाबों को पूरा कर पाते है ऐसे एक ख्वाबों से भरी दुनिया ललित सिंह देवरा की भी है। उनका जन्म 7 अगस्त 2004 में उदयपुर राजस्थान में हुआ।
ललित के पिताजी का नाम मिस्टर दौलत सिंह है। ललित सिंह एक ब्लॉगर,वेब डेवलपर और साथ ही आकर्षक एंटरप्रेन्योर है। बहुत ही कम उम्र में बहुत कुछ हासिल करने वाले ललित इतने से रुकने वाला नहीं हैं।
उनके सपनों ने तो अब उड़ान भरी है, वो अकेले 250 से ज्यादा स्टार इन्फ्लुएंसर और कंपनीज के साथ काम कर चुके हैं और अब उनके पैरों को मानो पंख लग गए हैं। वह अपना कदम एंटरप्रेन्योर की तरफ बढ़ाना चाहत हैं। ललित ने अपनी जीवन में कई सफलताएं देखी हैं, तो कई असफलताओं को भी देखा है, इसीलिए वह अब अपने कदम इसमें जमाना चाहते हैं। इसी क्षेत्र में ही आगे बढ़ना चाहते हैं।
बचपन में देखा एक ख्वाब और अपनी काबिलियत पर उन्हें पूरा यकीन था, परन्तु काबिलियत होने के साथ साथ उन्हें और अधिक तजुर्बे की जरूरत थी। यही कारण था कि उन्होंने 250 से भी ऊपर कंपनीज में काम किया साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में भी कार्य किया।
वह कोई काम छोटा या बड़ा नहीं मानते वे सभी कार्य को मन लगा कर करते हैं। उनके इसी लगन और तजुर्बे ने आज उन्हें एक नई ऊंचाई पर लाकर खड़ा कर दिया है।