- रास्ते में चाकू को निकाला जाता तो हो सकता था मरीज को खतरा
- ढाई घंटे की दुर्लभ सर्जरी के बाद बैसाखी पर चल पा रहा है मरीज
- करनाल में ज्वैलरी शॉप में लूट के लिए बदमाशों ने की वारदात
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स ट्रामा सेंटर में करीब ढाई घंटे की दुर्लभ सर्जरी के बाद एक मरीज की पीठ में धंसे चाकू को निकाल लिया गया। करनाल में ज्वैलरी शॉप में लूट के लिए आए बदमाशों ने ज्वैलर की पीठ में चाकू घोंप दिया था। इस हालत में ज्वैलर को आठ घंटे बाद एम्स लाया जा सका। एम्स के डॉक्टरों के अनुसार गनीमत यह रही की राह में किसी ने ज्वैलर की पीठ से चाकू नहीं निकाला, नहीं तो अधिक रक्त बहने से उसकी जान को खतरा हो सकता था।
शनिवार को इसकी जानकारी देते हुए एम्स के चिकित्सकों ने बताया कि अब मरीज की हालत बेहतर है और वह बैसाखी के सहारे चल पा रहा है। घटना 12 जुलाई को करनाल में अपनी ज्वैलरी शॉप के बाहर काम कर रहे 30 साल के ज्वेलर को बदमाशों ने पीठ पर चाकू घोंप दिया था। घटना के तुरंत बाद परिजन ज्वैलर को पास के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां पर उपचार न मिलने पर मरीज को पीजीआई लाया गया, लेकिन यहां भी मरीज की हालत को देख कर डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और एम्स ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। गनीमत यह थी कि जब मरीज को एम्स लाया गया तब तक वह होश में था। चाकू ह्रदय में रक्त का संचार करने वाली महाधमनी से महज कुछ मिलीमीटर ही ऊपर रह गया था।
एम्स ट्रामा सेंटर के प्रमुख और आर्थोपेडिक सर्जरी के प्रोफेसर डा. कमरान फारूकी ने बताया कि यह चाकू रीढ़ की हड्डी और वर्टिब्रा डी-6 व डी-5 को चीर कर अंदर तक धंस गया था। यदि चाकू पर थोड़ा भी दबाव पड़ता तो महाधमनी कट जाती और मरीज की मौत हो सकती थी। इसलिए परिजन या नजदीकी अस्पताल के डॉक्टरों ने बिना जानकारी के चाकू को निकालने की कोशिश न करके ठीक ही किया। सर्जरी के बाद मरीज के दोनों हाथ, दायं पैर में जान है। हालांकि चाकू की वजह से उसके बाएं में जान नहीं दिख रही। ऐसे में अगले एक साल के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा।
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चुनौतीपूर्ण था सर्जरी करना
एनेस्थीसिया के विशेषज्ञ डा. अभिषेक ने बताया कि यह सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। मरीज को पेट के बल पर उल्टा लिटा कर एनेस्थीसिया और वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। सामान्य तौर पर सीधा लिटा कर एनेस्थीसिया करते हैं। इस केस में लैरिंगोस्कोप तकनीक की मदद से एनेस्थीसिया दिया गया। सुरक्षित तरीके से चाकू को निकालकर स्क्रू व राॅड डालकर मरीज की रीढ़ की हड्डी को ठीक किया गया।ट्रामा सेंटर के प्रोफेसर डा. अमित गुप्ता ने बताया कि सर्जरी के दस दिन बाद मरीज की रिकवरी तेजी से हो रही है। उम्मीद है कि पुनर्वास से वह ठीक हो जाएगा।