नोएडा। पुलिस ने किडनी प्रत्यारोपण गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक बांग्लादेशी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि तीन आरोपी फरार हैं। आरोपी फर्जी दस्तावेज व धोखे से एक डोनर को बांग्लादेश से लाकर नोएडा में किडनी प्रत्यारोपण का प्रयास कर रहे थे। पैसों का विवाद होने पर इसकी सूचना डोनर ने ही पुलिस की दे दी जिससे मामला खुल गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की तहरीर पर ही पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करके डोनर सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
डीसीपी सेंट्रल जोन हरीशचंदर के अनुसार, बांग्लादेश निवासी मोहम्मद कबीर हुसैन की किडनी फेल हो गई थी। कबीर व उसके भाई सगीर ने बांग्लादेश के ही अहमद शरीफ को पैसों का लालच देकर किडनी देने के लिए तैयार कर लिया। कबीर भाई के साथ 22 दिसंबर को भारत आया और शरीफ को भी भाई बनाकर नोएडा ले आया। यहां दिल्ली के शाहीन बाग निवासी एजेंट अब्दुल मन्नान व बिहार के सिवान निवासी बाजुल हक ने तीनों को नोएडा के सेक्टर-71 के एक गेस्ट हाउस में रुकवा दिया।
यहां पर कबीर व शरीफ के खून की जांच सेक्टर-62 स्थित एक अस्पताल में कराई गई। अगले सप्ताह किडनी लगाई जानी थी, लेकिन सोमवार को शरीफ का दोनों भाइयों से विवाद हो गया। उसने पुलिस को घटना की सूचना दे दी। पुलिस के कहने पर स्वास्थ्य विभाग ने जब जांच की तो पूरा मामला खुल गया। एसीएमओ (प्रशासन) डॉ. शशि कुमारी ने आरोपियों के खिलाफ फेज-3 पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर पूरे प्रकरण में शामिल लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके छापा मारा तो गेस्ट हाउस पर अहमद शरीफ व बाजुल हक मिले। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जबकि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है।
पहले भी करा चुके हैं कई लोगों की किडनी ट्रांसप्लांट
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अब्दुल मन्नान और बाजुल हक द्वारा पहले भी तीन लोगों की किडनी प्रत्यारोपण कराने की जानकारी मिली है। दोनों बांग्लादेश से आने वाले लोगों के रुकने और अन्य काम कराने की पूरी जिम्मेदारी लेते थे। इसके लिए एक माह में 5 से 7 लाख रुपये लेते थे। अब्दुल फरार है जिसकी पुलिस तलाश कर रही है।
बेटा बीमार होने पर डोनर जाना चाहता था घर, विवाद हुआ
मामले में 4.50 लाख टका में सौदा हुआ था, लेकिन इसी बीच डोनर अहमद शरीफ का बेटा बीमार हो गया। उसने पैसे मांगे तो 20 हजार रुपये सगीर ने दे दिए, लेकिन बेटे की तबीयत ज्यादा खराब होने पर डोनर ने घर जाने की जिद की। इस बात पर विवाद हो गया। सगीर आदि ने उससे अभद्रता की तो उसने नोएडा पुलिस को फोन करके सूचना दे दी।
फर्जी दस्तावेज लगाए
बांग्लादेश से लेकर भारत तक जो भी दस्तावेज आरोपियों ने पेश किए सभी फर्जी थे। सारे एग्रीमेंट फर्जी दस्तावेज पर किए गए थे। धोखाधड़ी में शामिल होने के कारण डोनर को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, गेस्ट हाउस में रहने के दौरान कोई कागजात वेरिफिकेशन के लिए भी नहीं दिए गए थे।