लखनऊ। राजधानी के सुशांत गोल्फ सिटी में रहने वाली कात्यायनी कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। कात्यायनी को उनकी फिल्म सन्स ऑफ द रिवर के लिए प्रतिष्ठित डब्ल्यूआईएफ (वीमेन इन फिल्म) इंडिया टीआईएफएफ (टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल) फेलोशिप अवॉर्ड से नवाजा गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से यह फेलोशिप दी गई है। इसके तहत 4 से 10 सितंबर के बीच टोरंटो में हुए समारोह में वे शामिल हुईं। वे चुनी गई छह महिला फिल्म निर्माताओं में से एक हैं।
कात्यायनी कुमार ने बताया कि प्रतिस्पर्धा के लिए 200 से अधिक आवेदन आए थे जिसका नेतृत्व अकादमी पुरस्कार (ऑस्कर) विजेता फिल्म निर्माता गुनीत मोंगा करती हैं और इसे वेव्स बाजार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय-भारत सरकार और एनएफडीसी का समर्थन प्राप्त है। सभी चयनितों को टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में जाने का अवसर मिला।
कात्यायनी ने अपनी पहली फीचर डॉक्यूमेंट्री ‘सन्स ऑफ द रिवर’ के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया, जो पंजाब की भाखड़ा नहर और क्षेत्र के गहराते मानसिक स्वास्थ्य संकट पर आधारित थी। इस फेलोशिप के माध्यम से कात्यायनी और उनके निर्माता एरिक कुक ने अपनी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने मास्टरक्लास, पिच सेशन और नेटवर्किंग कार्यक्रमों में भाग लिया।
पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर और भाई क्रिकेटर
कात्यायनी ने बताया कि उनका लखनऊ में घर है। इसके अलावा अमेरिका में भी उनका एक घर है। पिता विनय कुमार साॅफ्टवेयर इंजीनियर रहे हैं और अब वे भी फिल्म निर्माण में सक्रिय हैं। मां ज्वाया सिंह भी मुंबई में एक बड़ी कंपनी की हेड हैं। कात्यायनी ने बताया कि उनका भाई नरेंद्र कुमार क्रिकेटर है और उत्तर प्रदेश की टीम से खेल चुका है। गुरु के रूप में मनोवैज्ञानिक अमोल बहादुर ने उनका मार्गदर्शन किया। कात्यायनी की शिक्षा दिल्ली और अमेरिका में हुई। जिस फिल्म के लिए उन्हें फेलोशिप मिली है, उसका निर्माण उन्होंने 2019 में शुरू किया था। इसके बाद 2022 में भी दो लघु फिल्मों का निर्माण किया।