इस बार यमुना तट पर बांस के बगीचे में मनेगा शब्दों की दुनिया का जश्न
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
डीडीए के बांसेरा पार्क में पहला बड़ा आयोजन तय हो गया है। यहां 5 से 7 दिसंबर तक मशहूर कल्चरल फेस्टिवल जश्न-ए-रेख्ता आयोजित होगा। यमुना किनारे के शांत वातावरण में बांस के घने बगीचे और हरे-भरे मैदान में शब्दों और संगीत की महफिल जमेगी। जश्न-ए-रेख्ता के दस साल पूरे होने पर इस बार का आयोजन बेहद खास होगा।
तीन दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में उर्दू, शायरी, दिल्ली की तहजीब और संगीत का शानदार मेल देखने को मिलेगा। यमुना तट पर बांस से छनकर आती स्वच्छ हवा, फूलों से लदे पौधे और खुला हरियाली वाला माहौल इस आयोजन को और भी खास बनाएंगे। 5 दिसंबर की शाम गुलजार की महकती मौजूदगी से होगी जिसका संचालन दिव्या दत्ता करेंगी। इसके बाद सुखविंदर सिंह सूफी गीतों से माहौल को रंग देंगे। 6 दिसंबर को सलीम-सुलेमान की जुगलबंदी, उर्दू शायरी के रंग-ओ-नूर और कई दिलचस्प सत्र रखे गए हैं। वहीं, 7 दिसंबर को जावेद अख्तर शायरी और बातों से समां बांधेंगे। इसके बाद शंकर महादेवन और प्रतिभा सिंह बघेल अपनी आवाज से शाम को यादगार बनाएंगे। कार्यक्रम के आखिरी पड़ाव में अबी संपा और रुसील रंजन की कव्वाली महफिल को ऊर्जा से भर देगी। डीडीए ने बांसेरा पार्क को ऐसे ही सांस्कृतिक आयोजनों के लिए तैयार किया था। यहां प्रकृति और कला साथ-साथ अनुभव होगा। जश्न-ए-रेख्ता की बुकिंग से न सिर्फ पार्क का नाम बड़े आयोजनों की सूची में जुड़ गया है बल्कि आगे इसी तरह के कार्यक्रमों की बुकिंग से डीडीए की आय भी बढ़ने की उम्मीद है।