ग्रेटर नोएडा (नरेंद्र भाटी)। जारचा थाना क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में 28 सितंबर 2015 को हुए इकलाख हत्याकांड के मामले में मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. अनिल कुमार सिंह की कोर्ट में शाइस्ता की गवाही हुई। शाइस्ता ने सभी आरोपियों की पहचान का संपूर्ण विवरण दिया और दस नए आरोपियों के नाम अदालत को बताए।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता यूसुफ सैफी ने बताया कि बिसाहड़ा गांव में गोहत्या की सूचना पर इकलाख की पीट-पीट कर हत्या करने का आरोप लगा था। हमले में इकलाख का बेटा दानिश भी गंभीर रूप से घायल हुआ था। मामले में पुलिस ने गांव के 18 युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इनमें से रवि की जेल में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मामला अभी जिला न्यायालय में विचाराधीन है। मंगलवार को जिला न्यायालय में शाइस्ता ने बयान दर्ज कराते समय दस और आरोपियों के नाम लिए हैं। शाइस्ता का आरोप है कि घटना के बाद इन आरोपियों के नाम रिपोर्ट में दर्ज नहीं किए गए थे। इससे पहले न्यायाधीश के सामने 164 के बयान में शाइस्ता ने 7 आरोपियों के नाम लिए थे जिनमें एक नाबालिग भी था। एक आरोपी रवि की जिला कारागार में मौत हो गई थी।
विवेचक पर आरोपियों के नाम न जोड़ने का लगाया आरोप
जिला कोर्ट में शाइस्ता के बयान दर्ज कराने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ब्रह्मदत्त गौड़ ने जिरह में के दौरान पूछा कि घटना के बाद ही आरोपियों नाम क्यों नहीं लिए गए तो शाइस्ता ने कहा कि पुलिस ने दस आरोपियों के नाम ही दर्ज करने को कहा था। शाइस्ता ने विवेचक पर आरोप लगाया कि उसने और नाम नहीं बढ़ाए।
पुलिस सुरक्षा के बीच कोर्ट पहुंची
हत्याकांड के बाद परिवार बिसाहड़ा गांव छोड़कर मुरादनगर रहने लगा था, लेकिन इस समय परिवार आगरा में रहता हैं। परिवार ने शाइस्ता की शादी दिल्ली के महरौली में की थी। मंगलवार को महरौली से पुलिस सुरक्षा के बीच शाइस्ता न्यायालय पहुंची और गवाही दी। अब आरोपी पक्ष के अधिवक्ता बयानों पर बहस करेंगे। आरोपियों की तरफ से चार अधिवक्ता हैं। अधिवक्ता ब्रहमदत्त गौड़ ने जिरह की, लेकिन अन्य अधिवक्ता बुधवार को जिरह करेंगे।