नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कहा कि मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 को मानने के लिए सभी बीमा कंपनियां बाध्य हैं। ये कानून 2018 में लागू हुआ था इसलिए इसे तभी से इसे प्रभावी करना बीमा कंपनियों के लिए बाध्यकारी है। इसमें किसी भी तरह की देरी इस कानून की भावना व मकसद के विपरीत होगा।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि बीमा कंपनियों पर निगरानी करना और कानून का पालन सुनिश्चित करवाना बीमा नियामक आईआरडीए की जिम्मेदारी है। आईआरडीए अपनी इस जिम्मेदारी से आंखें नहीं मूंद सकता। आईआरडीए को ये देखना होगा कि बीमा पॉलिसी इस कानून के अनुरूप हों।
हाईकोर्ट का ये निर्देश एक महिला की याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। दि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने सिजोफ्रेनिया के इलाज संबंधी खर्च वाले महिला के क्लेम को खारिज कर दिया था। कंपनी का कहना था कि मानसिक असंतुलन बीमा पॉलिसी के दायरे में शामिल नहीं हैं। इस फैसले को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने कहा याची महिला 6.67 लाख रुपये का क्लेम लेने की हकदार थी। अदालत ने मुकदमे के खर्च के तौर पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए महिला को देने का निर्देश बीमा कंपनी को दिया है। - एजेंसी