ओवरलोडिंग बसों पर कार्रवाई करते एआरटीओ।
23 सितंबर को यमुना एक्सप्रेसवे पर राज कल्पना ट्रेवल्स की स्लीपर बस में लगी थी आग
फिर सामान लादकर चलाई जाने लगीं बसें,
परिवहन विभाग की औचक कार्रवाई में हकीकत उजागर, नियमों को ताक पर रखकर चल रहीं 47 बसें सीज 76 पर जुर्माना
माई सिटी रिपोर्टर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे 23 सितंबर की रात पर जिस कल्पना ट्रेवल्स की स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत हुई थी। लेकिन अब भी उस एजेंसी की बसों में बेधड़क नियमों की डग्गेमारी चल रही है। यह हकीकत परिवहन परिवहन विभाग के औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई। राज कल्पना ट्रेवल्स की एक और स्लीपर बस को परिवहन विभाग ने सीज किया है। पकड़े जाने पर बस में क्षमता से ज्यादा यात्री सवार मिले। साथ ही बस की छत पर लगे कैरियर पर सामान भी लदा मिला। जिसके कारण आपातकाल स्थिति में खुलने वाला द्वार भी बंद था। यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस हादसे में भी छत पर लदे सामान को बड़ी वजह माना गया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि खतरे का सफर बंद नहीं हुआ है। अब भी ऐसी स्लीपर बसें मौत बनकर दौड़ रही हैं।
परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल ने 9 अक्तूबर से रविवार के बीच ऑपरेशन कवच के तहत जिले के दस से ज्यादा स्थानों पर चेकिंग की। अभियान के दौरान एक दो नहीं बल्कि 47 ऐसी स्लीपर बसें मिलीं जो कि मौत बनकर सड़क पर दौड़ रही थीं। इन बसों को तत्काल सीज किया गया ताकि यमुना एक्सप्रेसवे की तरह और हादसे न हाें। बसों में ओवरलोडिंग, यात्री सुरक्षा व्यवस्था, आपातकाल स्थिति से निपटने की व्यवस्थाएं नदारद मिलीं। अभियान के दौरान 76 बसों के विरुद्ध चालान की कार्रवाई की गई।
अब तक नहीं आई तकनीकी जांच की रिपोर्ट: यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में स्लीपर बस की तकनीकी जांच करने के लिए मुख्यालय स्तर की टीम गठित की गई थी। इस टीम को बस की जांच करनी थी और हादसा होने का कारण पता करना था। हादसा हुए 18 दिन बीत गए लेकिन जांच रिपोर्ट में क्या कारण निकलकर आया इसका पता नहीं चल सका। जिलास्तर टीम की जांच में तो बस बिल्कुल दुरुस्त पाई गई थी।
तकनीकी जांच के बाद ही छोड़ी जाएंगी बसें:
सीज की गई बसों को केवल चालान या जुर्माना जमा करने के आधार पर नहीं छोड़ा जाएगा। सभी बसों की तकनीकी जांच कराई जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन्हें ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के मानकों पर परखा जाएगा। जांच में बसों के पूरी तरह फिट और सुरक्षित पाए जाने के बाद ही उन्हें छोड़ने पर विचार किया जाएगा। मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीकरण को निलंबित करने की कार्रवाई की जा सकती है। ताकि बार-बार बस संचालक इस तरह की लापरवाही न बरतें।
वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था कर गंतव्य तक भेजे यात्री:
परिवहन विभाग ने जिन बसों को सीज किया उनमें सवार यात्रियों को गंतव्य तक भेजने के लिए वैकल्पिक बस की व्यवस्था भी की। जो बसें सीज की थीं वह मध्यप्रदेश के खुजराहो समेत अन्य जिलों में जा रही थीं। दो बसों को सीज करके मोरना बस स्टैंड पर खड़ा करा दिया। बस में सवार यात्री इस बीच परेशान होने लगे। उन्हें घर भिजवाने के लिए बस की व्यवस्था भी की गई। ताकि उन्हें गंतव्य तक भेजा का सके।
तीन दिन के अभियान में 47 बसों के विरुद्ध सीज और 76 पर चालान की कार्रवाई की गई है। इन बसों की तकनीकी जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बस में सवार यात्रियों को गंतव्य तक भेजने के लिए वैकल्पिक बस की व्यवस्था भी की गई।
-डॉ. उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ प्रवर्तन।
ओवरलोडिंग बसों पर कार्रवाई करते एआरटीओ।
ओवरलोडिंग बसों पर कार्रवाई करते एआरटीओ।