फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नजफगढ़: चार बार लगे शिलान्यास के पत्थर पर अब तक तैयार नहीं हुआ अस्पताल

विज्ञापन
विज्ञापन
विनोद डबास
विज्ञापन

नई दिल्ली। देश की राजधानी के गांवों में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है। इन इलाकों में गत एक माह से रोजाना सौ से अधिक ग्रामीण मर रहे हैं। दरअसल ग्रामीण इलाके में अस्पताल बनाने एवं डिस्पेंसरी के लिए बनाए गए भवनों में स्वास्थ्य सेवा शुरू करने में सरकारें गंभीर नहीं हैं।
इसकी बानगी नजफगढ़ में अस्पताल बनाने और कुतुबगढ़ में बनाए गए डिस्पेंसरी भवन के तौर पर देखी जा सकती है। नजफगढ़ में 15 साल के दौरान चार बार शिलान्यास होने के बावजूद अभी तक अस्पताल बनकर तैयार नहीं हुआ है। वहीं कुतुबगढ़ गांव में चार साल पहले बने भवन में अभी तक स्वास्थ्य सेवाएं देने की शुरुआत नहीं हुई है।
विज्ञापन

नजफगढ़ में करीब दो सौ बेड का अस्पताल बनाने की करीब ढाई दशक पहले चर्चा आरंभ हुई थी और यहां वर्ष 2004 से लेकर 2019 के दौरान चार बार बुनियाद के तौर पर पत्थर पर पत्थर रखने के बावजूद अस्पताल बनकर तैयार नहीं हुआ है। यहां पर वर्ष 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय सर्वप्रथम अस्पताल बनाने के लिए बुनियाद रखी गई थी।
इसके बाद डा. मनमोहन सिंह की दोनों सरकारों के समय वर्ष 2009 एवं 2014 के दौरान भी अस्पताल बनाने का ऐलान करने के साथ-साथ शिलान्यास किया गया, मगर निर्माण की एक ईंट नहीं लगी।
नरेंद्र मोदी की पहली सरकार के समय वर्ष 2019 में यहां एक बार फिर अस्पताल बनाने के लिए बुनियाद रखी गई। हालांकि इस बार यहां अस्पताल बनाने का कार्य शुरू हो गया, लेकिन अभी तक अस्पताल चालू नहीं हुआ है। अस्पताल भवन की स्थिति देखकर लग रहा है कि यह चालू होने में कम से कम दो साल लग जाएंगे, क्योंकि अभी निर्माण कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। यहां पर केंद्र सरकार अस्पताल बना रही है।
छह-सात लाख आबादी के लिए एक अस्पताल व दो स्वास्थ्य केंद्र
नजफगढ़ इलाके में करीब छह-सात लाख आबादी है और उनके लिए स्वास्थ्य सेवा के नाम में एक अस्पताल एवं दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। उनमें सुविधाओं का घोर अभाव है। इस अस्पताल एवं स्वास्थ्य केंद्रों में हरियाणा के सीमावर्ती गांवों के ग्रामीण भी दवा लेने आते हैं।
चार साल से डिस्पेंसरी का भवन पड़ा है वीरान
गांव कुतुबगढ़ के साथ-साथ आसपास के गांवों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने वर्ष 2014 में शहीद भगत सिंह एलोपैथिक डिस्पेंसरी के लिए भवन बनाने की शुरुआत की थी और वर्ष 2017 में यह भवन बनकर तैयार हो गया। हालांकि चार साल बीतने के बाद भी इसमें स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं हुई है। इस भवन पर ताला लगा हुआ है।
विज्ञापन

इतना ही नहीं, भवन की खिड़की दरवाजे टूटने शुरू हो गए हैं। यह भवन गुलजार होने से पहले खंडहर होने लगा है, जबकि यह भवन डिसपेंसरी के बजाय अस्पताल चालू करने लायक है। स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में इस मामले में इलाके में कार्य कर रही संस्था सेंटर फॉर यूथ कल्चर लॉ एंड एनवायरमेंट ने उपराज्यपाल का दरवाजा खटखटाया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें