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कार में अकेले होने पर भी मास्क लगाने के खिलाफ याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कार में अकेले होने पर भी मास्क लगाने के खिलाफ दायर याचिका पर बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में कई लोगों ने चालान किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने केंद्र, दिल्ली सरकार तथा याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
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केंद्रीय स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से अधिवक्ता फरमान अली मगरे ने कहा था कि मंत्रालय ने कार में अकेले होते हुए मास्क लगाने का आदेश कभी जारी नहीं किया। उन्होंने कहा कि लोगों का स्वास्थ्य राज्य का विषय है और दिल्ली सरकार को इस पर फैसला लेना है।
वहीं दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया था कि अपना निजी या कार्यालय का वाहन चलाने के दौरान अकेले होते हुए मास्क लगाना अप्रैल 2020 में अनिवार्य किया गया था और ये आदेश अब भी प्रभावी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी निजी वाहन को सार्वजनिक स्थल माना था।
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याचिका दायर करने वाले वकीलों में से अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने दावा किया था कि वह नौ सितंबर 2020 को कार में अकेले अपने काम पर आ रहे थे। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोका और मास्क न पहनने के लिए पांच सौ रुपये का चालान किया था जबकि वह कार में अकेले थे। उन्होंने चालान रद्द करने तथा प्रताड़ना के लिए दस लाख का मुआवजा दिलाने की मांग की थी।
वहीं अन्य याचिकाकर्ता सुदेश कुमार ने कोर्ट को बताया गया कि कार चलाते समय मुंह व नाक को स्कार्फ से कवर करने के बाद उनका चालान किया गया जबकि उस समय वह कार में अकेेले थे। उन्होंने कहा जो चालान उन्हें दिया गया उसमें अपराध, उसके होने की दिन तारीख नहीं लिखी थी, ये चालान एक सब इंस्पेक्टर ने जारी किया था जबकि चालान बुक पर पहले से मजिस्ट्रेट की मोहर थी। इसके अलावा उन्हें जुर्माने की राशि के एवज में कोई रसीद भी नहीं दी गई।
याची के वकील ने ये भी कहा कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के चार अप्रैल 2020 के आदेश के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस वार्ता कर सभी सूचित किया था कि कार में अकेेले होने पर मास्क लगाना अनिवार्य नहीं है। ऐसी दो अन्य याचिकाएं आदित्य कौशिक तथा दीपक अग्रवाल ने भी दायर की थीं। - एजेंसी
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