नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने फेसबुक के खिलाफ डिजीटल धोखाधड़ी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस शिकायत में फेसबुक और उसके वरिष्ठ अधिकारियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश तथा आईटी एक्ट के तहत आरोप लगाए गए हैं। एक कंपनी ने फेसबुक के खिलाफ पैसा लेकर सेवा न देने की शिकायत 2019 में की थी लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
कोर्ट के समक्ष दिल्ली पुलिस आयुक्त और साइबर क्राइम सेल की ओर से पेश वकील ने कहा कि ये शिकायत वास डाटा सर्विस ने की थी जो येपमी डॉट कॉम वेबसाइट के जरिये अपना कारोबार चलाती थी। ये कंपनी अब बंद हो चुकी है।
न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने अपने 24 मार्च के आदेश में दिल्ली पुलिस को अगली तारीख से पहले स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। शिकायत पर अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने फेसबुक अपने प्लेटफार्म पर कंपनियों को शुल्क लेकर प्रचार का ऑफर देता है। इसके लिए उन कंपनियों का लिंक फेसबुक पर दिया जाता है जिस पर क्लिक करने के बाद यूजर उस कंपनी की वेबसाइट पर पहुंच जाता है। ऐसा ऑफर दिया जाता है लेकिन तकनीकी खामी के कारण ऐसा होता नहीं है। फेसबुक ने अपनी प्रतिष्ठा के कारण जानबूझकर त्रुटिपूर्ण तकनीक विकसित की है जिससे उसे मोटी कमाई हो।
अधिवक्ता गौरव सिंह और एकता वत्स के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि याची कंपनी ने फेसबुक के जरिये प्रचार पर मोटी धनराशि इसलिए खर्च की थी ताकि उसके लिंक पर क्लिक करने वाले उनके ग्राहक बन सकें। इसके उलट जानबूझकर तकनीकी खामी के कारण ये यूजर कभी भी कंपनी की वेबसाइट तक नहीं पहुंच सके जिससे उससे भारी वित्तीय नुकसान व उसकी बदनामी हुई। इसके बावजूद फेसबुक उनसे पैसा लेता रहा।
याची ने कहा कि रिकार्ड चेक करने पर पता चला कि कंपनी की वेबसाइट पर ट्रैफिक लाने के लिए पैसा लिया गया लेकिन तकनीकी खामी के कारण ऐसा नहीं हुआ। इसकी शिकायत 2019 में दिल्ली पुलिस से की गई थी लेकिन आज तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसलिए केंद्र व दिल्ली पुलिस को संयुक्त रूप से एसआईटी बनाने तथा केस की जांच उसे सौंपने का निर्देश दिया जाए।
याची की ये भी मांग है कि केंद्र सरकार को डिजीटल धोखाधड़ी की जांच के लिए सक्षम अधिकरण बनाने और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया जाए। - एजेंसी