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Noida News: वर्दी और वेतनमान को लेकर हरियाणा पुलिस और जेल विभाग आमने-सामने

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- डीजीपी ने गृह विभाग को लिखा- बैज और पे-स्केल आपस में मेल नहीं खाते
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- जेल अधीक्षक संघ ने गृह सचिव को लिखा- पुलिस विभाग के तथ्य तर्कहीन

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। हरियाणा में पुलिस और जेल विभाग के बीच वर्दी और वेतन को लेकर खींचतान तेज हो गई है। पुलिस विभाग की तर्ज पर जेल अधिकारियों के ऊंचे रैंक वाले बैज पहनने पर आपत्ति जताते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शत्रुजीत कपूर ने गृह विभाग को पत्र लिखकर इसे नियमों के खिलाफ बताया है। वहीं, जेल अधीक्षक संघ ने भी गृह सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा को पत्र लिखकर डीजीपी की आपत्ति को तर्कहीन बताते हुए कहा कि समस्या बैज की नहीं बल्कि वेतन असमानता की है।

डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने गृह विभाग को भेजे पत्र में लिखा है कि जेल अधिकारियों को 2022 के नियमों के तहत जो बैज दिए गए हैं वे उनके वास्तविक पे स्केल से मेल नहीं खाते। वर्दी और प्रतीक हमेशा वेतनमान से जुड़े होते हैं। इस तरह तो यूनिफॉर्म फोर्सेज की कमांड और एकरूपता प्रभावित होगी।
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वहीं, जेल अधीक्षक संघ ने गृह सचिव को पत्र भेजकर कहा कि वर्दी हमेशा रैंक पर आधारित होती है न कि पे स्केल पर। पुलिस विभाग की आपत्ति है कि जेल अधीक्षक जिलों में तैनात एसपी के तरह बैज लगा लगाते है जबकि जेल के अंदर अधीक्षक की भूमिका भी एसपी की तरह ही होती है। जेल अधीक्षक क्लास-वन श्रेणी में आते हैं। ऐसे में उन्हें समान वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए।

पहली बार जेलों में एचपीएस तैनात, ये विवाद तो नहीं
सरकार ने शनिवार को जेल प्रशासन में बदलाव करते हुए पुलिस विभाग के एचपीएस अधिकारियों की तैनाती की है। इसके तहत डीएसपी विवेक चौधरी को भोंडसी जेल का सुपरिटेंडेंट, डीएसपी सत्येंद्र कुमार को यमुनानगर जेल का सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया। पहली बार जेलों में एचपीएस अधिकारी लगाए गए हैं। सवाल उठता है कि यह बदलाव जेल विभाग के पारंपरिक कैडर और अनुशासन व्यवस्था के लिए चुनौती तो नहीं साबित हो रहा है।
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वर्दी में अंतर

जेल विभाग में डिप्टी सुपरिटेंडेंट रैंक के अधिकारियों की वर्दी पर अशोक स्तंभ होता है जबकि पुलिस के डीएसपी थ्री-स्टार पहनते हैं। इस बदलाव से जेल विभाग के अधिकारियों के सामने सुपरिटेंडेंट को सैल्यूट करने का सवाल पैदा करता है। मनोहर सरकार ने जेल अधिकारियों के लिए अलग वर्दी शुरू की थी।
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