हर बच्चे के भीतर सीखने और आगे बढ़ने की असीम क्षमता होती है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले कई बच्चे ऐसे परिवारों से आते हैं, जहां उन्हें गरीबी, लैंगिक असमानता और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों में समानता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता जैसे मूल्यों का विकास करना भी आवश्यक है। शिक्षा समाज में वर्षों से चली आ रही रूढ़िवादी सोच को बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम है। जब एक बच्चा शिक्षित होता है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक तैयार करने की पाठशाला भी है।
इसलिए जरूरी है कि बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारियों की भी शिक्षा दी जाए। यही शिक्षा उन्हें बेहतर भविष्य के साथ बेहतर समाज निर्माण के लिए भी तैयार करेगी।
- अनीता यादव, सहायक अध्यापक, कंपोजिट स्कूल मोरना