- ग्रेटर नोएडा की कंपनी के खाते में अलग-अलग बैंक खातों से रकम आई, रकम के बदले डिजिटल करेंसी देने का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। ग्रेटर नोएडा की एक कंपनी के बैंक खातों में अलग-अलग खातों से करीब 3.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराने और उसके बदले यूएसडीटी (डिजिटल करेंसी) लेने का मामला सामने आया है। रकम ट्रांसफर होने के बाद कंपनी के बैंक खाते संदिग्ध लेनदेन के चलते फ्रीज हो गए। कंपनी की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में फरहान उर्फ लवकुश और आदिल समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
शिकायतकर्ता ग्रेटर नोएडा के महिला उद्यमी पार्क में संचालित कंपनी में पार्टनर हैं। जून 2025 में उनके परिचित आदिल, जो दिल्ली के लाजपत नगर स्थित कोटक महिंद्रा बैंक में कार्यरत था। उसके माध्यम से फरहान उर्फ लवकुश से संपर्क हुआ था। आरोप है कि फरहान ने कंपनी से 90.50 रुपये प्रति यूएसडीटी की दर से डिजिटल करेंसी खरीदने में रुचि दिखाई। शिकायत में कहा गया है कि नए कारोबारी होने के कारण कंपनी ने यूएसडीटी की आपूर्ति के लिए पहले भुगतान लेने की शर्त रखी। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों से कंपनी के खातों में करीब 3.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। कंपनी ने रकम अलग-अलग खातों से आने पर सवाल किया तो फरहान ने पैसे को वैध बताते हुए संबंधित खातों के दस्तावेज और केवाईसी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
इसके बाद कंपनी ने प्राप्त रकम से यूएसडीटी खरीदकर उसके बताए वॉलेट में भेजना जारी रखा। मामला तब खुला जब कंपनी के आरबीएल व आईसीआईसीआई बैंक खातों को संदिग्ध लेनदेन के कारण फ्रीज कर दिया गया। शिकायत के मुताबिक, खातों में करीब 20 से 30 लाख रुपये की रकम फ्रीज हुई और करीब 6.71 लाख रुपये डेबिट हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ता ने फरहान से संपर्क किया। आरोप है कि वह पहले मिलने से बचता रहा, लेकिन बाद में दिल्ली के मयूर विहार स्थित होटल में मुलाकात हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस दौरान फरहान ने सभी खातों की केवाईसी देने से इनकार किया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फरहान ने भरोसा देकर कंपनी से यूएसडीटी हासिल किया, लेकिन उसके बाद कंपनी को संदिग्ध बैंक लेनदेन में फंसा दिया। डीसीपी साइबर प्रीति यादव ने बताया कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और जांच की जा रही है।
अलग-अलग खातों से आई रकम ने बढ़ाया शक : शिकायत के मुताबिक, फरहान ने अपने खाते से रकम भेजने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों से कंपनी के खातों में करीब 3.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए। कंपनी ने इस पर सवाल उठाया तो रकम को वैध बताया गया और सभी खातों की केवाईसी बाद में देने का भरोसा दिया गया। इसी रकम से यूएसडीटी खरीदकर आरोपी के बताए डिजिटल वॉलेट में भेजे जाने का दावा शिकायत में किया गया है।