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Noida News: यमुना-हिंडन का जलस्तर घटा, लेकिन खतरा बरकरार

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-प्रशासन के सामने डूब क्षेत्र में जाने वालों को रोकना चुनौती
-किसानों की लाखों रुपये की सब्जी की फसलें बर्बाद

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिले में यमुना और हिंडन नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। पानी कम होने से प्रभावित लोग अपने घरों और फार्म हाउस का सामान निकालने के लिए डूब क्षेत्र में लौटने लगे हैं। जिला प्रशासन और पुलिस की अपीलों के बावजूद लोगों का डूब क्षेत्र की ओर जाने से रोकना चुनौती बना हुआ है। प्रशासन की ओर से लगातार मुनादी कर लोगों से अपील कर रहा है कि वह डूब क्षेत्र में न जाएं।
यमुना और हिंडन नदी में जलस्तर बढ़ने से जिले के कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए है। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं और घरों में पानी भर गया है। प्रशासन ने राहत कार्य तेज करते हुए अब तक करीब 3700 से अधिक लोगों को प्रभावित बताया है। इनमें से 3400 लोगों को सुरक्षित रूप से बनाए गए आठ शरणालयों में शिफ्ट किया गया है। वहीं 1750 मवेशियों को भी सुरक्षित स्थलों पर पहुंचाया गया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए जिला प्रशासन ने 182 नावें और 410 टेंट उपलब्ध कराए हैं। प्रशासन ने शरणालयों में प्राथमिक चिकित्सा, पेयजल, बिजली और सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई है। सेक्टर-150 के मोमनाथल, कोंडली, पंडितों की डेरी समेत आसपास के गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। यहां हिंडन और यमुना का संगम होने से हालात ज्यादा बिगड़े।
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राहत शिविरों में मिल रही मददः
यमुना के डूब क्षेत्र से विस्थापित परिवारों के लिए नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-135 और 150 के आसपास बख्तावरपुर, छपरौली, कोंडली, नंगली वाजिदपुर, नंगला नगली और झट्टा गांव के बारात घरों में राहत शिविर बनवाए हैं। इन कैंपों में खानपान की व्यवस्था भी की गई है। वहीं पुश्ते के किनारे बनाए गए अस्थाई टेंट में करीब 800 से ज्यादा गायों को रखा गया है। हालांकि अब भी सेक्टर-135 से लेकर सेक्टर-150 और सेक्टर-94 से सेक्टर-126 तक पुश्ते पर पानी का स्तर खतरनाक बना हुआ है। जहां पहले घुटनों तक पानी था। वहीं अब कमर तक पानी पहुंच चुका है।

किसानों पर टूटा कहर, फसलें बर्बादः
सबसे ज्यादा मायूसी डूब क्षेत्र में बसे किसानों के चेहरों पर झलक रही है। बाढ़ की मार ने उनकी मेहनत और सालभर की उम्मीदें छीन ली हैं। जिन खेतों में कभी हरी-भरी फसलें लहलहाती थीं, वहां अब बर्बादी पसरी है। किसानों की लाखों रुपये लागत वाली सब्जी की फसलें तोरी, लोकी, सीताफल, लोबिया, भिंडी, टमाटर, हरी मिर्च और धनिया पानी में सड़ चुकी हैं। तेज बहाव से खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी बह गई है। किसान अब गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
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बीमारियों का बढ़ रहा खतराः
बाढ़ का एक और खतरनाक असर स्वास्थ्य पर दिख रहा है। प्रभावित इलाकों में जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। स्वाथ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, हैजा, डायरिया, आई फ्लू, त्वचा और श्वसन संबंधी रोग फैल सकते हैं। वहीं बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में सांप और जहरीले कीड़े-मकौड़े निकलने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। जिससे लोगों लोगों सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

मोहम्मद बिलाल
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