'समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान के तहत बुधवार को विश्वकर्मा जयंती व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर छात्रों, शिक्षकों, व्यावसायियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों से संवाद किया गया। इसके तहत भविष्य की दिशा तय करने के लिए रोडमैप पर चर्चा और फीडबैक भी प्राप्त किया गया।
उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने की दिशा में योगी सरकार के विजन को साकार करने की दिशा में गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद ने भी विशेष पहल की है। शिक्षा परिषद की तरफ से 21 सितंबर को कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका उद्घाटन करेंगे। 'समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान के तहत बुधवार को विश्वकर्मा जयंती व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर छात्रों, शिक्षकों, व्यावसायियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों से संवाद किया गया। इसके तहत भविष्य की दिशा तय करने के लिए रोडमैप पर चर्चा और फीडबैक भी प्राप्त किया गया।
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‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश-2047’ विषय पर इस कार्यशाला का आयोजन महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) में किया जाएगा। कार्यशाला के विशेष सत्र में विषय विशेषज्ञ के रूप में मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ. केवी राजू मौजूद रहेंगे। एमजीयूजी के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार, यह कार्यशाला प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के लक्ष्यों को हासिल करने का व्यावहारिक वैचारिक मंथन है। कार्यशाला की अध्यक्षता कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह करेंगे।
एमजीयूजी के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह का कहना है कि विकसित यूपी-2047 के विजन को साकार करने के लिए हर व्यक्ति, हर संस्था को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मानना है कि प्रदेश की इस विकास यात्रा में हर नागरिक सहभागी है। मुख्यमंत्री के ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ का लक्ष्य प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ही नहीं बनाना है बल्कि 25 करोड़ प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं को साकार स्वरूप प्रदान करना है।
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करीब सवा दो लाख से अधिक फीडबैक दर्ज
सरकार द्वारा विकसित पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक करीब दो लाख फीडबैक दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1.55 लाख और नगरीय क्षेत्रों में करीब 70 हजार फीडबैक प्राप्त हुए। आयु वर्ग के अनुसार करीब 77 हजार सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग से, करीब 1.14 लाख से अधिक सुझाव 31-60 वर्ग और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से करीब 30 हजार से अधिक सुझाव आए हैं।
शिक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक राय
जनता के बीच शिक्षा अब भी सबसे बड़ा मुद्दा है। शिक्षा से जुड़े करीब 74 हजार सुझाव मिले। इसके अलावा नगरीय एवं ग्रामीण विकास से जुड़े करीब 40हजार, स्वास्थ्य और समाज कल्याण पर 18-18 हजार तथा कृषि क्षेत्र से संबंधित 32 हजार से अधिक सुझाव दर्ज किए गए।
इन जिलों से मिल रही भागीदारी
एटा, मेरठ, मुजफ्फनगर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, मैनपुरी, कानपुर देहात, हरदोई आदि जनपदों से सबसे अधिक भागीदारी रही। इन जिलों से कुल 78,500 से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए। यह दर्शाता है कि जनता इस अभियान को गंभीरता से ले रही है।