शहर के एक होटल में हड्डी के डॉक्टरों की कार्यशाला में चिकित्सकों को सम्मानित करते आयोजन समिति स
शहर के एक होटल में आर्थोपेडिक डॉक्टरों का राष्ट्रीय सम्मेलन
गोरखपुर। डायरेक्ट एटीरियर एप्रोच टू टोटल हिप रिप्लेसमेंट विधि से कूल्हा प्रत्यारोपण होने पर पैरों के छोटे रह जाने की समस्या खत्म हो जाएगी। इस विधि से कूल्हा प्रत्यारोपण के लिए पीठ के बजाय पेट की तरफ से सर्जरी होगी। इसके लिए विशेष प्रकार के ओटी टेबल की आवश्यकता होती है लेकिन पीजीआई लखनऊ में नॉर्मल ओटी टेबल पर ही इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है।
यह जानकारी दी है पीजीआई लखनऊ के शल्य चिकित्सक डॉ. कुमार केशव ने। वह शहर के एक होटल में दो दिन से चल रहे हड्डी रोग के डॉक्टरों के सम्मेलन में बोल रहे थे। डॉ. कुमार ने कहा कि पेट की तरफ से सर्जरी करने पर पैर के छोटा या बड़ा होने का रिस्क बेहद कम होता है। दोनों पैरों के बीच दो मिलीमीटर से भी कम का अंतर रहता है। कूल्हा प्रत्यारोपण की पुरानी विधि में अक्सर मरीजों के पैर छोटे या बड़े हो जाते हैं। दोनों पैर के बीच में पांच से लेकर 15 मिलीमीटर तक का अंतर हो जाता है। इसे दूर करने के लिए प्रत्यारोपण की नई तकनीक विकसित की गई है। अमेरिका में अब 50 फीसदी कूल्हा प्रत्यारोपण इसी तकनीक से हो रहा है।
बच्चों में भी होता है कूल्हा खराब
केजीएमयू के डॉ संजीव कुमार व डॉ. बीबी त्रिपाठी ने बताया कि जन्म से बच्चों का कुल्हा खराब हो सकता है। इसे हिप डिस्प्लेजिया कहते हैं। यह जन्मजात विकृति है। कुछ बच्चों में यह जन्म के दो से तीन साल बाद सामने आती है। इसमें कूल्हे की हड्डियां पतली हो जाती हैं। जोड़ आपस में चिपक जाते हैं। पैर छोटा हो जाता है। वहीं मेडिकल कॉलेज सैफेई के डॉ. अजय राजपूत व डॉ. अमित सिंह श्रीनेत ने कूल्हा प्रत्यारोपण के एक महीने के अंदर इंफेक्शन होने पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि दांतों का संक्रमण भी कूल्हे के प्रत्यारोपण को खराब कर सकता है। इससे प्रत्यारोपण के बाद इंफेक्शन हो जाता है। खून में छिपा संक्रमण कूल्हे की सर्जरी को फेल कर सकता है। इसे पल्स लिवाज कहते हैं। बुजुर्गों में होने वाले एसिटेबुलम फ्रैक्चर पर डॉ. रितेश कुमार, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. संजीव सिंह, डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कूल्हे की जोड़ की हड्डी टूटने पर फ्रैक्चर हो जाता है। आमतौर पर यह फ्रैक्चर कूल्हे की कटोरी में होता है। डॉ. हरपाल सिंह शेट्टी, डॉ. एसके त्रिपाठी ने कूल्हा प्रत्यारोपण के बाद हड्डी में फ्रैक्चर पर व्याख्यान दिया। डॉ. अशोक यादव, डॉ. सुधीर श्याम कुशवाहा ने भी व्याख्यान दिया।
12 प्रांतों के 450 चिकित्सक हुए शामिल
आयोजन सचिव डॉ. अमित मिश्र ने बताया कि पूर्वी यूपी में पहली बार आर्थो एज का आयोजन हुआ। यह आयोजन यूपी आर्थोपेडिक एसोसिएशन ने किया। इस आयोजन में गोरखपुर और बनारस के चिकित्सकों ने समन्वयन किया। इसमें 12 राज्यों के 450 चिकित्सकों ने अपने व्याख्यान दिए। पीजी छात्रों ने रिसर्च पेपर पढ़ा। लाइव सर्जरी करके दिखाया गया।