तीन माह पहले ही हुई थी शिकायत, स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने साध रखी थी चुप्पी
डिसेंट हॉस्पिटल में हेल्थ इंश्योरेंस में 1.20 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का मामला
गोरखपुर। हेल्थ इंश्योरेंस का 1.20 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करने वाले डिसेंट हॉस्पिटल को सील करने की तैयारी चल रही है। दो दिन पहले डिप्टी सीएमओ डॉ. अनिल सिंह की अगुवाई में अस्पताल गई टीम ने प्रबंधन को नोटिस देकर जवाब मांगा था। चर्चा है कि सोमवार को अस्पताल सील कर दिया जाएगा। फिलहाल इस अस्पताल में मरीजों का उपचार रोक दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, डिशेंट अस्पताल में चिकित्सक के रूप में अपनी सेवा देने वाले डॉ. एके सिंह ने मार्च में प्रबंधन से अनबन के बाद अस्पताल से नाता तोड़ लिया था। हालांकि ओपीडी की फीस व कुछ अन्य बकाया को लेकर उन्होंने मई में ही स्वास्थ्य विभाग में अस्पताल प्रबंधन की शिकायत की थी। उस वक्त अस्पताल की जांच के बजाय स्वास्थ्य विभाग के ही किसी अफसर ने हस्तक्षेप कर भुगतान कराने की कोशिश की। कहा जा रहा है कि उस वक्त संचालक पीछे हट गया।
इसी बीच बजाज आलियांस फाइनेंस कंपनी ने पुलिस में शिकायत की। कंपनी ने बताया कि दिल्ली निवासी सत्यदीप के नाम पर 1.80 लाख रुपये का क्लेम पास कराया गया, जबकि सत्यदीप कभी अस्पताल आया ही नहीं था। पुलिस की जांच में यह आरोप सही पाया गया। मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने अस्पताल संचालक शमशुल और उसके पार्टनर प्रवीण उर्फ विकास त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आगे की जांच में गगहा निवासी अफजल और अस्पताल मैनेजर को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि अस्पताल ने बस्ती और गोरखपुर शाखा में कम से कम 15 फर्जी मरीजों के नाम पर क्लेम पास कराए और करोड़ों की हेराफेरी की। जांच में यह भी सामने आया कि मरीजों का फॉलोअप दिखाने के लिए जिस एपेक्स हॉस्पिटल का नाम इस्तेमाल किया गया, वह अस्तित्व में ही नहीं है। इसके बाद डॉक्टर ने हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में अपने फर्जी हस्ताक्षर किए जाने की शिकायत दर्ज कराई।
तीन दरवाजे थे दो बंद कराए गए
बताया जा रहा है कि इस अस्पताल में आने-जाने तीन दरवाजे थे, जिससे इस पर कार्रवाई करना आसान नहीं था। प्रकरण चर्चा में आने के बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. अनिल सिंह की अगुवाई में एक टीम वहां जांच करने गई। टीम ने वहां के दो दरवाजों को बंद कराया। साथ ही अस्पताल में किसी भी तरह से मरीज भर्ती करने या ओपीडी संचालित करने पर रोक लगाने के साथ ही प्रबंधन को नोटिस भी पकड़ाया। इसके बाद अब अस्पताल सील करने की तैयारी है।
कोट
इस अस्पताल सील किया जाएगा। इसके लिए निर्देश दे दिए गए हैं। दो दिन पहले टीम भेजकर इस बात की तस्दीक कराई गई कि वहां अब किसी प्रकार की चिकित्सकीय गतिविधि का संचालन तो नहीं हो रहा है। पंजीकरण समाप्त होने के बावजूद अस्पताल का संचालन कैसे हो रहा था, इसकी भी जांच कराई जाएगी।
डॉ. राजेश कुमार, सीएमओ