समय से तीन दिन पहले ही पश्चिमी राजस्थान से शुरू हुई मानसून की वापसी
गोरखपुर। अपने तय समय से एक सप्ताह पहले आया दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने सामान्य कैलेंडर से तीन दिन पहले ही पश्चिमी राजस्थान से वापस होने लगा है। जून में इसके आगमन पर पूर्वांचल में सामान्य से अधिक (107 प्रतिशत) बारिश की उम्मीद जताई गई थी। पूर्वी यूपी में बादल छाए और गरज-चमक भी खूब दिखी, लेकिन बारिश सामान्य से काफी कम (केवल 46 फीसदी) हुई। अब लौट रहे मानसून से थोड़ी आस बची है। विशेषज्ञों का कहना है कि लौटता मानसून 17 से 19 सितंबर के बीच पूर्वांचल और तराई में जमकर बरसेगा, जिससे आंकड़ों की गागर कुछ भरी दिखेगी।
आमतौर पर गोरखपुर में 15 जून के आसपास मानसून पहुंचता रहा है। इस बार भी 12 जून से जोरदार प्री मानसूनी बारिश शुरू हो गई लेकिन, 14 जून को चली हवा के चलते मानसून की द्रोणिका दक्षिण तरफ झुकी और बिहार के रास्ते जिस मानसून को पूर्वांचल के देवरिया से प्रवेश करना था, वह सोनभद्र चला गया। मानसून एक बार जो राह भटका तो अगले तीन महीने यही खेल चलता रहा। बादल गोरखपुर में छाए और बारिश वाराणसी मंडल में हो रही थी। अब मानसून की विदाई का वक्त आ गया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून अपने तय समय 17 सितंबर से तीन दिन पहले ही लौटने वाला है। हालांकि, वर्तमान में पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दाब क्षेत्र मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है। इससे निष्प्रभावी हुई मानसून द्रोणी में नमी दोबारा सक्रिय हो गई है। बंगाल की खाड़ी से आ रही यह नमी प्रदेश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में पहुंच रही है, जिससे बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर समेत तराई के जिलों में 17 से 19 सितंबर तक झमाझम बारिश की संभावना है।
मौसम विज्ञानी मोहम्मद दानिश ने बताया कि इस बार पूर्वांचल में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। हालांकि बारिश की पृष्ठभूमि बनी और कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश भी हुई, लेकिन हवा के दबाव से बादल बिखर गए।
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तीन साल में सबसे कम बारिश
मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार इस साल अब तक केवल 609 मिलीमीटर ही बारिश हुई है, जबकि औसत अनुमानित बारिश 1,118 मिलीमीटर थी। यह सामान्य से 46 प्रतिशत कम है। वहीं पिछले साल 1195 मिलीमीटर और 2023 में 1106 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई थी। वर्ष 2020 में 1106 और 2021 में 606 मिलीमीटर बारिश हुई थी।