तीन वेबसाइट के जरिये चलाते थे बैटिंग का खेल
एसीपी सेंट्रल नोएडा राजीव गुप्ता का कहना है कि जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी वेबसाइट के जरिये ऑनलाइन बैटिंग कराते थे। इनमें क्रिकेट मैचों के अलावा अन्य प्रकार की बैटिंग भी शामिल थी। गिरोह के सदस्य लोगों को रुपये लगाकर अधिक कमाई करने का लालच देते थे। इसके बाद उन्हें वेबसाइट पर लॉगइन कराकर हार-जीत का खेल खिलाया जाता था। पुलिस के अनुसार गिरोह के सरगना बताए जा रहे लल्लन उर्फ लालू और आदित्य दूर बैठकर सदस्यों को वेबसाइट की लॉगइन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराते थे। गिरफ्तार आरोपी अलग-अलग लोगों से संपर्क कर उन्हें ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में शामिल करते थे।
किराये पर लेते थे बैंक खाते, डिलीट कर देते थे डाटा
कोतवाली प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि गिरोह के सदस्य लेनदेन के लिए बड़ी संख्या में बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। यह खाते दूसरे लोगों से सौदे के आधार पर किराये पर लिए जाते थे। खाताधारकों को इसके बदले तय रकम या लालच दिया जाता था। गेमिंग के दौरान कुछ लोगों के जीतने पर उनके यूपीआई खातों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिये रुपये भेजे जाते थे, जबकि अन्य लेनदेन के लिए किराये पर लिए गए बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस को आशंका है कि इन खातों के जरिये ठगी की रकम को इधर-उधर किया जाता था।
आरोपी साइबर गतिविधियों से जुड़े डाटा को मोबाइल फोन और लैपटॉप से मिटा देते थे। जिससे जांच में साक्ष्य न मिल सकें। इसके बाद वह अपना ठिकाना बदल लेते थे। कुछ दिन बाद किसी दूसरी जगह पर नया नेटवर्क शुरू कर देते थे। गिरोह इसी तरीके से अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय रहकर अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा था।
बिहार और यूपी के रहने वाले हैं गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करन (20) निवासी माधोपुर बिहार, दीपक (26) निवासी भागलपुर बिहार, शशि भूषण (26) निवासी सहरसा बिहार, साजन (21) निवासी सहरसा बिहार, सुनील कुमार (22) निवासी खगड़िया बिहार, साजन कुमार (19) निवासी माधोपुर बिहार, सुमित कुमार (21) निवासी माधोपुर बिहार, राजू कुमार (23) निवासी सहरसा बिहार, राहुल कुमार (22) निवासी सीतामढ़ी बिहार, नीतिश कुमार (20) माधोपुर बिहार, शिवम सिंह (25) निवासी बाराबंकी, मिथलेश (21) निवासी खगड़िया बिहार और बसंत कुमार (25) निवासी खगड़िया बिहार के रूप में की है। इनमें अधिकांश आरोपी बिहार के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं, जबकि शिवम सिंह उत्तर प्रदेश के बाराबंकी का निवासी है। गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 19 से 26 वर्ष के बीच है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप, एक रेडमी टैबलेट, 35,700 रुपये नकद और 29 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस अब गिरोह के सरगनाओं की भूमिका, बैंक खातों के नेटवर्क और ऑनलाइन लेनदेन की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया और कितनी रकम का लेनदेन किया है।
20 हजार रुपये वेतन का लालच देकर युवाओं को गिरोह में किया था शामिल
पुलिस जांच में सामने आया है कि वांछित आरोपियों ने करीब डेढ़ महीने पहले ओसिस वेनेसिया सोसाइटी में फ्लैट किराये पर लिया था। इसी फ्लैट से ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग के नाम पर ठगी का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। गिरोह के वांछित सरगना लल्लन उर्फ लालू ने अपने साथियों की मदद से गिरफ्तार आरोपियों को नौकरी और कमीशन का लालच देकर गिरोह में शामिल किया था। लल्लन मूलरूप से बिहार का रहने वाला है। गिरफ्तार आरोपियों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने का लालच दिया गया था।
आरोपियों को थी ठगी के धंधे की जानकारी
गिरफ्तार आरोपियों को इस बात की जानकारी थी कि वह जिस काम में शामिल हैं, वह लोगों के साथ धोखाधड़ी है। इसके बावजूद वे गिरोह के लिए काम कर रहे थे। आरोपी पिछले डेढ़ महीने से इस ठिकाने से वारदात को अंजाम दे रहे थे। पुलिस जांच में पता चला है कि गिरोह के सदस्य प्रतिदिन करीब 10 हजार रुपये तक की ठगी कर लेते थे। अब तक 100 से अधिक लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग में रुपये लगाने का लालच देकर लाखों रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी मिली है।
गिरफ्तार आरोपियों को भेजा जेल
पुलिस ने गिरफ्तार सभी 13 आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। वहीं गिरोह के वांछित सरगना लल्लन उर्फ लालू और उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने आरोपियों की ओर से संचालित किए जा रहे फर्जी गेमिंग पोर्टल को भी बंद करा दिया है। अब पुलिस बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और ठगी के शिकार लोगों की पहचान कर रही है, जिससे गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।