सूरजपुर में ऑटो चलाने वाले बुलंदशहर के गुलावठी निवासी जफरुद्दीन, उसके रिश्तेदार सलाउद्दीन और गुलफाम को 12 साल से अधिक समय तक जिंदा युवक की हत्या और अपहरण के केस में न्यायालय के चक्कर लगाने पड़े। तीनों को कारावास भी काटना पड़ा। गुलावठी के ऑटो चालक जब्बार के लापता होने पर उसके पिता इकबाल ने तीनों पर अपहरण, हत्या और शव छुपाने की धारा मेें केस दर्ज कराया था।
गौतमबुद्धनगर के न्यायालय ने केस की सुनवाई की गई और आरोप साबित नहीं होने पर तीनों को बरी कर दिया गया। अधिवक्ता रजनीश यादव ने बताया कि 12 अप्रैल 2011 को बुलंदशहर के भामरा गांव निवासी जब्बार लापता हो गए थे, वह सूरजपुर में ऑटो चलाते थे । जब्बार के पिता इकबाल ने इस मामले में जफरुद्दीन, रिश्तेदार मेरठ के सलाउद्दीन और सिकंदराबाद के गेसुपुर गांव के गुलफाम पर अपहरण व हत्या का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था।
जब्बार व तीनों आरोपी सूरजपुर में ही ऑटो चलाते थे। इसके चलते बुलंदशहर न्यायालय ने यह केस गौतमबुद्ध नगर जिला न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें चार महीने कारावास काटने के बाद जमानत मिली।
अधिवक्ता का कहना है कि जब्बार एक युवती को प्रेमप्रसंग में लेकर फरार हो गया था। इसके चलते उसके पिता व परिजन उसे गांव नहीं आने देना चाहते थे। जब्बार के जीवित होने की जानकारी मिलने के बावजूद उनके पिता इकबाल ने न्यायालय को अवगत नहीं कराया। हालांकि जब्बार 25 अक्तूबर 2019 के बाद न्यायालय में पेश हो गया और उसने तीनों पर लगाये गए आरोप को गलत बताया।
जिंदा होने के बावजूद ढूंढ नहीं पाई पुलिस
अधिवक्ता का कहना है कि इस केस में पुलिस ने काफी लापरवाही बरती। जफरुद्दीन समेत तीन पर अपहरण, हत्या व शव छुपाने का आरोप लगाकर केस दर्ज कराया गया था। लेकिन पुलिस ने शव बरामद नहीं होने पर आरोप पत्र अपहरण के आरोप में दाखिल किया। वहीं, ग्रामीणों को जब्बार के जिंदा होने व युवती को लेकर जाने की जानकारी थी। बावजूद इसके पुलिस जब्बार को ढूंढ नहीं पाई। अधिवक्ता का कहना है कि जब्बार के पिता की वजह से तीनों युवकों को प्रताड़ना व उनके परिवार को परेशानी उठानी पड़ी। इसलिए वह वादी के खिलाफ केस दायर करेंगे।