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अमेरिका के नागरिकों को ड्रग्स केस में फंसाने के नाम पर फर्जी कॉल सेंटर से ठगी

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फर्जी कॉल सेंटर से पकड़े गए आरोपी। अमर उजाला
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नोएडा। अमेरिका के नागरिकों को ड्रग्स केस में फंसाने के नाम पर ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का नोएडा पुलिस ने खुलासा किया है। कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने बुधवार तड़के सेक्टर-62 के आइथम टावर में चल रहे कॉल सेंटर से आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि सरगना फरार हो गया। आरोपी खुद को फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (एफबीआई) का अधिकारी बताकर ड्रग्स लेने वाले अमेरिका के नागरिकों को धमकाते थे। इसके एवज में आरोपी उनसे गूगल गिफ्ट कार्ड लेकर भारतीय मुद्रा में परिवर्तित करा लेते थे। गिरोह की प्रतिदिन की कमाई लगभग तीन लाख रुपये थी।
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एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने सूचना के आधार पर तड़के आइथम टावर में चल रहे एपी टेक्नोमार्ट प्राइवेट लिमिटेड कॉल सेंटर में छापा मारा तो पता चला कि यहां अमेरिका के नागरिकों से ठगी हो रही है। पुलिस ने यहां से आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मौके से 10 कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, 10 हेडफोन, राउटर, हार्ड डिस्क, 99 लेटरपैड समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आरोपी नाम बदलकर कैलिफोर्निया से फोन करने का झांसा देकर अमेरिका के नागरिकों को ड्रग्स केस में फंसाने के नाम पर धमकाकर गूगल गिफ्ट कार्ड लेते थे। गिरोह का सरगना पन्ना, मध्यप्रदेश निवासी विनोद लखेरा है जो अभी फरार है। विनोद ने अपना नाम माइकल रखा हुआ था। आरोपी बीच-बीच में नोएडा में आकर सेटअप देखता था और पन्ना से ही इस ऑफिस को कंट्रोल करता था। आरोपियों ने अमेरिका के वेंडरों से ऐसे लोगों का डाटा प्राप्त किया था जो ड्रग्स लेते थे। इन लोगों को आरोपी इंटरनेट कॉलिंग कर धमकाते थे।
ऐसे करते थे ठगी
एडीसीपी के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि ये नोएडा में रात में कॉल सेंटर चलाते थे। फिर इंटरनेट कॉलिंग कर खुद को एफबीआई या अन्य अमेरिकी एजेंसी का अधिकारी बताते थे। आरोपी कहते थे कि हमें अमेरिकी कानूनी एजेंसियों से आपके बैंक खातों की डिटेल मिल गई है। आपके द्वारा मैक्सिको व कोलंबिया में ड्रग्स का लेनदेन हुआ है। इसके बाद नागरिक डर जाते थे। फिर आरोपी मामले को रफा-दफा करने के लिए गूगल गिफ्ट कार्ड लेते थे। इन कार्डों को आरोपी पिक्सफुल ऑनलाइन साइट पर जाकर आधार, पैन कार्ड से सत्यापन कराकर ऑनलाइन ट्रेडिंग से भारतीय मुद्रा में परिवर्तित करा लेते थे।
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कंप्यूटर सर्विस के नाम पर भी करते थे ठगी
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि आरोपी कंप्यूटर सर्विस के नाम पर भी ठगते थे। आरोपी कंप्यूटर में वायरस डालकर सर्विस के नाम पर एनी डेस्क, अल्ट्राव्यूअर जैसे सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर उनके कंप्यूटर को रिमोट पर लेते थे। इस सर्विस के नाम पर आरोपी अमेजॉन, पे पाल, ईबे से सैकड़ों डॉलर लेते थे। फिर इन्हें अमेरिका के जेले, पिक्सफुल आदि पोर्टल पर जाकर डॉलर को भारतीय मुद्रा में परिवर्तित करा लेते थे।
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ये हैं गिरफ्तार आरोपी
1. सुमित त्यागी, फर्जी नाम रिक ऐलीन, मूल निवासी खरखौंदा मेरठ, 12वीं पास
2. अरुण चौहान, फर्जी नाम जैक, मूल निवासी हापुड़, बीकॉम पास
3. विशाल तोमर, फर्जी नाम हैनरी, मूल निवासी निधौली एटा, बी कॉम पास
4. राहत अली, फर्जी नाम विलसन, मूल निवासी हाफिजगंज बरेली, 12वीं पास
5.केशव त्यागी, फर्जी नाम जॉन, मूल निवासी रोहटा मेरठ, 12वीं पास
6. सुनील वर्मा, फर्जी नाम डेविड वाटसन, मूल निवासी पन्ना मध्यप्रदेश, बीए पास
7. प्रशांत लखेरा, फर्जी नाम रोबर्ट, मूल निवासी पन्ना मध्यप्रदेश, बीए पास
8. सतेंद्र लखेरा, फर्जी नाम डेविस, मूल निवासी पन्ना मध्यप्रदेश, बीएससी पास
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