डिटेंशन सेंटर में जगह नहीं
देशभर में सात डिटेंशन सेंटर हैं। इनमें सबसे नजदीकी केंद्र दिल्ली में है। मगर डिटेंशन सेंटर ज्यादातर भरे रहते हैं। बिना वीजा के रहने वाले विदेशियों को डिटेंशन सेंटर भेजे जाने पर लौटा दिया जाता है। खुफिया विभाग ऐसे विदेशियों को संबंधित थानाक्षेत्र में सौंप देता है। वहां अपराध करने पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है। जमानत के बाद उन्हें अदालत से पत्र जारी किया जाता है जिसके आधार पर वह कई माह तक जनपद में बने रहते हैं। नया केस शुरू होते ही उन्हें छह माह और रहने का मौका मिल जाता है।
चीन का एक और नागरिक पकड़े जाने से खुफिया विभाग अलर्ट
पिछले साल चीन के नागरिक सु फाई के गिरफ्तार होने के बाद एक और चीनी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपी बगैर वीजा के नेपाल के रास्ते देश में दाखिल हुए थे। लागतार दूसरी गिरफ्तारी के बाद खुफिया विभाग अलर्ट हो गया है। विभाग आरोपियों के सहयोगियों की तलाश में जुट गया है।
सबसे अधिक संख्या अफ्रीकी मूल के
गौतमबुद्ध नगर में वैध रूप से रहने वाले विदेशियों में नाईजीरिया, तंजानिया, सोमानिया, अफगानिस्तान और चीन एवं कोरिया आदि समेत करीब 15 देशों के नागरिक शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा अफ्रीकी देशों के निवासियों की है।
टूरिस्ट और मेडिकल वीजा पर आने वालों की संख्या ज्यादा
खुफिया विभाग के अधिकारियों के मुताबिक टूरिस्ट और मेडिकल वीजा पर आने वालों की संख्या काफी होती है। इसमें से कई लोग यहीं रह जाते हैं। हालांकि डिपोर्ट करते वक्त उन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता है।
कमिश्नरेट से समय-समय पर बगैर वीजा के रहने वाले विदेशियों को डिपोर्ट किया जाता है। आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने वालों को गिरफ्तार किया जाता है। अदालत से केस खत्म होने के बाद उन्हें वापस भेज दिया जाता है। -रामबदन सिंह, डीसीपी फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ)