- किसान, मजदूर और नौकरीपेशा परिवारों के खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद जिला, मंडल और राज्य स्तर पर बढ़ाया जिले का मान
दर्शन पाराशर
ग्रेटर नोएडा। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद जिले के कई युवा खिलाड़ी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर खेल जगत में नई पहचान बना रहे हैं। किसान, मजदूर और निजी नौकरीपेशा परिवारों से आने वाले इन खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद जिला, मंडल और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर यह साबित किया है कि सफलता के लिए मजबूत इरादे और निरंतर अभ्यास सबसे अहम होते हैं। इन खिलाड़ियों के परिवार आर्थिक रूप से संपन्न नहीं हैं, लेकिन उन्होंने बच्चों के सपनों को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। परिवारों के सहयोग और खिलाड़ियों की मेहनत का नतीजा है कि आज वे विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
हाल ही में रितेश कुमार ने ओपन दिल्ली स्टेट एनुअल एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 110 मीटर हर्डल दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। उनके पिता किसान हैं। वहीं मजदूर के बेटे रिशांत नागर ने दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप की ट्रायथलॉन स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मंडल स्तरीय अंडर-16 प्रतियोगिता में लव शर्मा ने रजत पदक जीता, जबकि मजदूर परिवार से आने वाली सुमिती सैनी ने 400 मीटर दौड़ में रजत पदक हासिल किया। इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उन्होंने साबित किया है कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर जारी रहे। संवाद
कोट्स-
संसाधन सीमित थे, लेकिन मेहनत में कभी कमी नहीं आने दी। अब राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना मेरा अगला लक्ष्य है। -रितेश कुमार
परिवार के संघर्ष ने मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। हर पदक मेरे माता-पिता की मेहनत को समर्पित है। -रिशांत नागर
पढ़ाई और खेल में संतुलन बनाकर लगातार अभ्यास किया। अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करना चाहता हूं। -लव शर्मा
हर दिन की मेहनत ने मुझे यह मुकाम दिलाया है। भविष्य में देश के लिए पदक जीतना मेरा सपना है। -सुमिती सैनी