उत्तर प्रदेश में कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में लगातार वृद्धि हो रही है। प्रदेश सरकार ने वित्तीय अनुशासन के साथ फिजूलखर्ची पर रोक लगाई है, जिससे वित्तीय प्रबंधन में सुधार हुआ है। बैंकिंग क्षेत्र का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह बातें प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में आयोजित ‘फ्रॉम फाइनेंशियल डिसिप्लिन टू ट्रांसफॉर्मिंग सर्विस डिलीवरी’ सत्र में कहीं।
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को उनकी योग्यता और क्षमता के आधार पर रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। अब तक करीब साढ़े नौ लाख लोगों को नौकरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले करीब एक लाख और लोगों को नौकरी देने का लक्ष्य है। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को रोजगार के साथ स्वरोजगार के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पहले कोई पूछता नहीं था, सरकार ने उनके जीवन में भी बदलाव लाने का प्रयास किया है। रेहड़ी-पटरी और रोज कमाकर खाने वाले लोगों को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया गया। इसके लिए छोटे कारोबारियों को आसान प्रक्रिया के तहत आर्थिक सहायता मिली। इसी तरह मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के माध्यम से युवाओं को पांच लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आया है। निवेश सारथी और निवेश पोर्टल के माध्यम से निवेशकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को बेहतर किया गया है। सरकार की नीतियों से औद्योगिक गतिविधियों को गति मिली है और कृषि व सेवा क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को 2027 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार वित्तीय अनुशासन, निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के माध्यम से इस लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है और इसे तय समय से पहले पूरा किया जाएगा।