एग्रीमेंट के मुताबिक काम करने को तैयार थी कंपनी, सेवा में कमी नहीं संवाद न्यूज एजेंसी
उपभोक्ता आयोग ने इंटीरियर कंपनी के हक में सुनाया फैसला
ग्रेटर नोएडा। जिला उपभोक्ता आयोग ने इंटीरियर डिजाइन के काम में सेवा में कमी के आरोप को खारिज कर दिया है। आयोग ने एक कंपनी द्वारा जमा रकम वापस दिलाने की मांग वाले वाद को नामंजूर कर दिया। कंपनी समझौते के अनुसार काम करने को तैयार थी। पंजाब के गुरदासपुर निवासी कमल ने 29 अक्तूबर 2022 को हाई क्रिएशन इंटीरियर प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से गाजियाबाद स्थित अपने फ्लैट का काम तय किया था। उन्होंने 5,63,770 रुपये में सौदा किया और 53,548 रुपये अग्रिम भुगतान किया। 10 दिसंबर 2022 को दोनों के बीच समझौता हुआ। काम 14 दिसंबर 2022 से शुरू होकर 28 जनवरी 2023 तक पूरा होना था। कमल का आरोप था कि कंपनी ने स्टैंडर्ड साइज के आधार पर लागत 7,59,134 रुपये कर दी। उन्होंने रसोई में तोड़फोड़ और 1,20,000 रुपये की मांग का भी आरोप लगाया। डिजाइन अंतिम न होने से काम रुका और कमल ने 29 जनवरी 2023 को रकम वापस मांगी।
कंपनी ने सुनवाई में बताया कि उसने समय पर काम शुरू किया था। फ्लैट का क्षेत्रफल पहले बताई गई जानकारी से अलग था। कंपनी ने कई डिजाइन भेजे, पर कमल ने उन्हें मंजूरी नहीं दी और बार-बार बदलाव किए। आयोग ने माना कि डिजाइन को मंजूरी देने में परिवादी की ओर से देरी हुई। ऐसे में कंपनी की ओर से सेवा में कमी साबित नहीं होती, जिसके आधार पर रकम वापसी की मांग खारिज कर दी गई।