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Noida News: एजेंसी पर एमओयू की मेहरबानी और नोटिस का दिखावा साथ में चला

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एजेंसी पर एमओयू की मेहरबानी और नोटिस का दिखावा साथ में चला
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-ई-साइकिल एजेंसी पर कार्रवाई के पत्र से भी प्राधिकरण अधिकारियों की कार्यशैली उजागर, सवालों के घेरे में मेहरबानी

-2025 में एजेंसी को एक भी नोटिस नहीं जारी किया गया, घपले के आरोप लगने के बाद भी आंख बंद कर बैठे रहे जिम्मेदार

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। शहर में पिछले तीन साल से पंक्चर पड़ी ई-साइकिल परियोजना में एजेंसी पर प्राधिकरण अधिकारियों की मेहरबानी कार्रवाई के पत्र से भी उजागर हुई है। अधिकारियों ने एक तरफ एजेंसी पर मेहरबानी दिखाते हुए पहले एमओयू के मुताबिक साइकिल संचालन न होने पर भी दूसरा एमओयू कर दिया। यही नहीं दूसरे एमओयू के अगले दिन ही एजेंसी को नोटिस भी जारी किया। 2023 से लेकर नवंबर 2024 तक एजेंसी को 10 पत्र चेतावनी और व्यवस्था सुधारने के लिए जारी किए गए। लेकिन वर्ष 2025 के 12 महीने में एक भी पत्र या नोटिस एजेंसी को नहीं जारी किया गया। गौरतलब है कि 2025 के सितंबर में ही साइकिल संचालक एजेंसी के साथ ही दूसरे एमओयू में विज्ञापन शर्त बदलने के गंभीर आरोप लगे थे। मामले में जांच शुरू हुई थी, इसके साथ ही प्राधिकरण अधिकारियों ने एजेंसी की तरफ से लगवाई गई प्रचार होर्डिंग्स भी हटवाने का दावा किया था। लेकिन जांच अब भी गोपनीय है।

ई-साइकिल संचालक एजेंसी पर 3 साल में भी साइकिल न चलने पर 15 अप्रैल को कार्रवाई कर प्राधिकरण ने दोनों अनुबंध समाप्त कर दिए हैं। साथ ही 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था और एक साल तक एजेंसी को प्रतिबंधित किया है। वरिष्ठ प्रबंधक की तरफ से जारी पत्र का सार यह है कि 30 सितंबर 2022 को पहला एमओयू 31 स्थल के लिए होने के बाद भी एजेंसी टर्बन मोबिलिटी साइकिल संचालन नहीं करवा पाई। फिर 10 जुलाई 2023 को दूसरा एमओयू इसी एजेंसी के साथ करते हुए 31 स्थल और दिए गए। फिर भी दोनों एमओयू की शर्तों के मुताबिक एजेंसी अब तक ई-साइकिल का संचालन नहीं करवा पाई।
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प्राधिकरण ने माना है कि तीन साल में एजेंसी ने ई-साइकिल का संचालन नहीं किया। इसके उलट प्रचार होर्डिंग्स लगवाई और कमाई की। परियोजना पंक्चर हो गई। लेकिन हैरानी की बात यह है कि ट्रैफिक सेल के जेई लेकर जीएम और एसीईओ तक के किसी अधिकारी को इसके लिए जिम्मेदार नहीं माना गया है।



ई-साइकिल परियोजना को लेकर जांच की गई। जांच में सामने आए तथ्यों पर एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। -सतीश पाल, एसीईओ, नोएडा प्राधिकरण।



योगेश तिवारी
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