औद्योगिक सेक्टर साइट-5 के उद्यमियों ने कहा, यूपीसीडा की ओर से नहीं दी जा रहीं मूलभूत सुविधाएं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक सेक्टर साइट-5 के उद्यमी अवैध गतिविधियों से परेशान हैं। उनका कहना है कि सेक्टर औद्योगिक विकास की जगह अवैध गतिविधियों का अड्डा बन गया है। पार्क में झुग्गियां बस चुकी हैं। अवैध तरीके से कंटेनर में शराब की दुकान खोल दी गई है। ज्यादातर गली और चौराहों पर अतिक्रमण हो चुका है। यूपीसीडा से मूलभूत सुविधा नहीं मिल रही है। बार-बार शिकायत के बाद भी यूपीसीडा पर कोई असर नहीं हो रहा।
उद्यमियों ने बताया कि सेक्टर में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। बारिश के बाद सड़कों पर जलभराव हो जाता है। कई गलियां ऐसी है जहां 20 साल से सड़कों का निर्माण तक नहीं कराया गया है। उद्योगों के बाहर ट्रक खड़ा करना भी मुश्किल हो जाता है। सेक्टर के अंदर कई पार्क है लेकिन उनको विकसित नहीं किया गया है। एक पार्क को किसी कंपनी ने गोद लिया हुआ है। आरोप है कि उसे विकसित करने के बाद पार्क को बंद रखा जाता है। किसी को उसमें जाने नहीं दिया जाता। वहीं एक पार्क पर पूरी तरह से अतिक्रमण हो गया है। पार्क का क्षेत्रफल 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक है। उस पर अवैध झुग्गियां बस चुकी है। वहां रहने वाले कुछ लोग कंपनियों में काम भी करते हैं।
सेक्टर की चहारदीवारी नहीं है। हर तरफ से गाड़ियों के आने के रास्ते है। इससे चोरी होने का खतरा ज्यादा रहता है। नालियां नहीं बनी है। सीवर भी नहीं है। पानी की आपूर्ति नहीं होने से उद्योगों में कामकाज प्रभावित रहता है। साफ-सफाई नहीं होती है। कूड़ा उठवाने के लिए झगड़ा करना पड़ता है। कूड़ा उठाने के बाद सेक्टर के ही खाली भूखंडों में डाल दिया जाता है।
सेक्टर में जल निकासी की व्यवस्था नहीं है। हल्की सी बारिश में जलभराव हो जाता है। - वीरेंद्र प्रताप सिंह रावल
मुख्य सड़क पर बाजार लगता है। अगर किसी कंपनी में आग लगी तो उस रास्ते से दमकल अंदर नहीं आ सकती। - आकाश सारस्वत
सेक्टर में अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। वेंडिंग जोन बनाया गया लेकिन अब तक उसे शुरू नहीं किया गया। - अंकित सैनी
सेक्टर के अंदर पार्क है लेकिन नाम के है। एक पार्क पर निजी कंपनी का कब्जा है तो एक पर अवैध झुग्गियां बस चुकी है। -विकास राय
सेक्टर की ज्यादातर स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। रात के समय सड़कों पर अंधेरा छाया रहता है।- शिवानी यादव
सेक्टर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उद्यमी समस्याओं से जूझ रहे हैं। यूपीसीडा काम नहीं कर रहा है। - विक्रांत रावल