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प्रवर्तन निदेशालय ने शुरू की बाइक बोट फर्जीवाड़े की जांच

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प्रवर्तन निदेशालय ने शुरू की बाइक बोट फर्जीवाड़े की जांच
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ग्रेटर नोएडा। देश के लाखों लोगों से अरबों की ठगी करने वाली कंपनी गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लि. (बाइक बोट) और इंडिपेंडेंट टीवी की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है। ईडी ने बाइक बोट फर्जीवाड़े में पहली एफआईआर दर्ज कराने वाले जयपुर निवासी सुनील मीणा को पत्र भेजकर बयान दर्ज कराने के लिए लखनऊ बुलाया है। बाइक बोट फर्जीवाड़े के मामले में अब तक 50 से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं लेकिन पहली एफआईआर सुनील मीणा ने दर्ज कराई थी। वहीं, जिला पुलिस ने भी ईडी के जांच शुरू करते ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान समेत कई राज्यों के ढाई लाख से अधिक निवेशकों को बाइक बोट के महाठगों ने एक साल में पैसा दोगुना करने का लालच दिया था। आरोपियों ने इस गोरखधंधे का सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार किया था और अधिक लोग जोड़ने वालों को मोटा कमीशन दिया था। आरोपियों के झांसे में आकर लाखों लोग कंपनी से जुड़कर पैसे दोगुने करने के लालच में गाढ़ी कमाई को कंपनी में निवेश करते चले गए। आरोपियों ने नवंबर-दिसंबर 2018 में निवेशकों को किश्त देना बंद कर दिया। इसके बाद आरोपी पोस्ट डेटेड (अग्रिम तिथि) के चेक देने लगे। करोड़ों रुपये के ये चेक बाउंस हो गए।
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गौतमबुद्ध नगर में इस मामले में सबसे पहली एफआईआर जयपुर निवासी सुनील मीणा ने दर्ज कराई थी। इसके चलते प्रवर्तन निदेशालय के सहायक निदेशक देवेंद्र कुमार सिंह ने पत्र भेजकर सात अगस्त को सुबह 11 बजे सुनील मीणा को लखनऊ बुलाया है। सुनील मीणा से बाइक बोट फर्जीवाड़े और इंडिपेंडेंट टीवी से संबंधित सभी दस्तावेज व साक्ष्य लखनऊ लाने के लिए कहा गया है।
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‘खोल दूंगा फर्जीवाड़े की परतें’
सुनील मीणा ने बताया कि उन्होंने 23 जनवरी, 2018 को एसएसपी कार्यालय में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। उनका फर्जीवाड़े में लगभग 28 लाख रुपया फंसा हुआ था। 12 फरवरी 2018 को मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसी दिन शाम को उन्हें आरोपियों ने 28 लाख रुपये का चेक देकर भुगतान कर दिया था और शिकायत वापस लेने के लिए कहा था। लेकिन उन्होंने शिकायत वापस लेने से मना कर दिया था। सुनील मीणा का कहना है कि उनका रुपया मिल चुका है, लेकिन लाखों लोगों का रुपया फर्जीवाड़े में फंसा हुआ है। वह उनके लिए संघर्ष कर रहे हैं और ईडी के अधिकारियों को सभी जानकारियों देकर फर्जीवाड़े की परतें खोलेंगे। इंडिपेंडेंट टीवी की भी जांच ईडी ने शुरू की है और संबंधित दस्तावेज मंगाए हैं।
इन पांच बिंदुओं पर ईडी करेगी जांच
खुलेआम दफ्तर खोलकर इतनी बड़ा फर्जीवाड़ा कैसे हुआ।
कितने निवेशकों से कितने रुपयों की ठगी हुई।
फर्जीवाड़े की रकम को किसने और कहां-कहां निवेश किया।
कितने आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
पर्दे के पीछे रहे मुख्यारोपियों की धरपकड़।
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