नोएडा। सुपरटेक के एमराल्ड कोर्ट मामले में प्राधिकरण ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) को करीब 70 नामों की सूची भेजी थी। इसमें करीब 60 नाम प्राधिकरण के अधिकारियों-कर्मचारियों और 10 नाम बिल्डर व उनसे जुडे़ वास्तुविदों के थे। एसआईटी ने इन्हीं नामों में से प्राथमिक जांच के बाद 30 के खिलाफ विजिलेंस में एफआईआर दर्ज कराई है। अब विजिलेंस की टीम जांच कर रही है। इसमें कुछ और नाम सामने आ सकते हैं।
प्राधिकरण के सूत्रों के मुताबिक , एसआईटी की जांच के दौरान एमराल्ड कोर्ट से जुड़े एक-एक अधिकारी-कर्मचारियों की सूची थमाई गई थी। इसमें कंप्यूटर ऑपरेटर तक के नाम थे, जिनके हस्ताक्षर एमराल्ड कोर्ट मामले के छोटे से छोटे दस्तावेज में मौजूद थे। एसआईटी की टीम तीन दिन तक रही थी और कई नामों की सूची सौंपी गई थी, लेकिन उनके जाने से पहले तक कई हस्ताक्षरों का मिलान नहीं हो पाया था। ऐसे में उनके जाने के बाद तक प्राधिकरण के अधिकारी पाए गए हस्ताक्षरों का मिलान करते रहे और जिनके हस्ताक्षर मिलते गए, उनके नामों की सूची लखनऊ भेज दी गई। वहीं, बिल्डर के वास्तुविदों और कंपनी के नाम भी शामिल रहे। इनमें से एसआईटी ने रिपोर्ट में चुनते हुए 26 अधिकारी और 4 बिल्डर व उनके निदेशक और दो वास्तुविदों के नामों की आखिरी सूची निकाली। इसमें से दो अधिकारियों की मृत्यु हो चुकी है। लिहाजा, 30 लोगों के खिलाफ विजिलेंस में एफआईआर दर्ज कराई गई।
ग्रीन बेल्ट पर कब्जा मामला: इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी भी जांच के घेरे में
सेक्टर-93ए स्थित एमराल्ड कोर्ट में ग्रीन बेल्ट पर कब्जा करने के मामले में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं। जांच में सात हजार वर्गमीटर ग्रीन बेल्ट की जमीन को भूल जाने जैसी लापरवाही में संलिप्त अधिकारियों की पहचान की जाएगी। प्रथमदृष्टया उद्यान विभाग के अधिकारियों की लापरवाही मानी जा रही है, लेकिन जांच के बाद ही दोषी अधिकारियों का पता चलेगा। जांच की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
दरअसल, एटीएस सोसाइटी ने अपनी ओर से सटी ग्रीन बेल्ट के पास दीवार खड़ी कर रखी है, लेकिन सुपरटेक ने यहां दीवार नहीं बनाई। इसका फायदा यह हुआ कि वर्षों से एमराल्ड कोर्ट के निवासी इस ग्रीन बेल्ट का उपयोग कर रहे थे। आरोप है कि सुपरटेक ने जानबूझकर ग्रीन बेल्ट के पास दीवार नहीं बनाई और जमीन को कब्जे में रखा। हालांकि, अब प्राधिकरण ने इसकी तार से घेराबंदी कर दी है।
प्राधिकरण की एसीईओ नेहा शर्मा का कहना है कि कई मुद्दों पर पड़ताल करनी होगी। नियोजन विभाग से जो भी नक्शा आता है, वह सीधे उद्यान विभाग के पास नहीं जाता है। वह सबसे पहले इंजीनियरिंग विभाग के पास जाता है। उन्हें बताया जाता है कि नक्शे के मुताबिक यहां रोड, बाउंड्री सहित कई अन्य संसाधनों को विकसित किया जाना है। इसके बाद नक्शा उद्यान विभाग के पास जाता है। अब यहां पता लगाना है कि आवंटन हुआ तो नक्शा इंजीनियरिंग विभाग से उद्यान विभाग को गया या नहीं। इसका पता उद्यान विभाग को है या नहीं, इन्हीं सभी बिंदुओं पर जांच होगी। इसमें जो भी संलिप्त हैं उनकी सूची बनाकर शासन को भेजी जाएगी।