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Noida News: काउंसलिंग से सुलझे घरेलू विवाद, 906 मामलों का निस्तारण

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जनपद गौतमबुद्धनगर की तीनों तहसीलों आज संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया।
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- डेढ़ साल में एफडीआरसी में पहुंचे 1,014 प्रार्थना पत्र, सिर्फ 57 मामलों में दर्ज हुई प्राथमिकी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पति-पत्नी के बीच विवाद, घरेलू कलह, दहेज की मांग और शराब की लत से जुड़े हर मामले का समाधान मुकदमे के जरिए ही हो, यह जरूरी नहीं है। गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट के फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लीनिक (एफडीआरसी) में काउंसलिंग और मध्यस्थता के जरिए ऐसे मामलों को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। एक जनवरी 2025 से 31 अगस्त 2026 तक जिले के तीन एफडीआरसी में कुल 1,014 प्रार्थना पत्र पहुंचे। इनमें 906 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। निस्तारित मामलों में 57 में ही प्राथमिकी दर्ज हुई, जबकि अन्य मामलों में काउंसलिंग और मध्यस्थता के जरिए विवाद का समाधान कराया गया।
डीसीपी महिला सुरक्षा सुनिति के अनुसार, 108 मामले अभी मध्यस्थता के लिए लंबित हैं। सेक्टर-108 स्थित महिला सहायता प्रकोष्ठ/एफडीआरसी में 450 प्रार्थना पत्र मिले, जिनमें 406 का निस्तारण हो चुका है। 44 मामलों में मध्यस्थता चल रही है। निस्तारित मामलों में 32 में प्राथमिकी दर्ज हुई।
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नॉलेज पार्क स्थित एफडीआरसी में 296 शिकायतें पहुंचीं। इनमें 276 का निस्तारण किया जा चुका है और 20 मामलों में मध्यस्थता जारी है। यहां निस्तारित मामलों में 11 में प्राथमिकी दर्ज हुई। वहीं, चैरी काउंटी स्थित एफडीआरसी में 268 शिकायतें मिलीं। इनमें 224 का निस्तारण हो चुका है, जबकि 44 मामलों में मध्यस्थता चल रही है। निस्तारित मामलों में 14 में प्राथमिकी दर्ज हुई।
काउंसलिंग से फिर साथ आए दंपती

नॉलेज पार्क एफडीआरसी में पहुंचे एक मामले में काउंसलिंग के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद सुलझ गया। पूजा और अरुण (दोनों काल्पनिक नाम) की शादी वर्ष 2013 में हुई थी और उनके दो बेटे हैं। शिकायत में पति पर शराब पीकर मारपीट करने और अतिरिक्त दहेज की मांग करने का आरोप लगाया गया था।
एफडीआरसी में पहले दोनों पक्षों की अलग-अलग बात सुनी गई। इसके बाद विवाद के कारणों और आपसी मतभेद को समझने का प्रयास किया गया। दूसरे चरण में दोनों को सकारात्मक परामर्श दिया गया और आपसी कड़वाहट दूर कर साथ समय बिताने के लिए प्रेरित किया गया। लगातार काउंसलिंग के बाद पति ने वैवाहिक जीवन सुधारने के लिए शराब छोड़ने संबंधी उपचार लेने का निर्णय लिया। इसके बाद दोनों आपसी सहमति से साथ रहने लगे।
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एफडीआरसी में आने वाले मामलों में पति-पत्नी और दोनों परिवारों की बात अलग-अलग सुनी जाती है। इसके बाद विवाद की वास्तविक वजह समझकर काउंसलिंग और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान का प्रयास किया जाता है।
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