तावडू। उपमंडल के गांव गोयला निवासी किसान महबूब ने शत प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद उन्नत खेती के तरीके अपनाकर दूसरों किसानों के लिए एक मिसाल पैदा की है। गोयला निवासी महबूब ने बताया कि मात्र तीन वर्ष की आयु में ही पोलियो की चपेट में आने पर उसके दोनों पैर खराब हो गए, उसके बावजूद उन्होंने आठवीं तक की पढ़ाई की। दिव्यांगता के चलते महबूब ने कृषि क्षेत्र में ही अपना भविष्य तलाशने की ठानी। करीब दस साल पूर्व पिता की मृत्यु होने पर महबूब थोड़ा कमजोर पड़ा लेकिन उसने हार नहीं मानी। अपनी हिम्मत को बढ़ाते हुए उन्होंने ट्रैक्टर में हाथ के ब्रेक और हाथ की क्लच लगवाई। जिसके बाद वह अपने खेतों की जोताई व बिजाई स्वयं करने लगा। इसके साथ ही खेती की नई तकनीक सीख और सरकारी योजनाओं के लाभ लेते हुए उन्होंने खेती के उन्नत तरीके अपनाए। महबूब के पास स्वयं की तीन एकड़ कृषि भूमि है और चार एकड़ भूमि उन्होंने पट्टे पर ले रखी है। जिसमें वह सब्जी इत्यादि का उत्पादन कर अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं।
महबूब उस समय चर्चा में आया जब उन्होंने मात्र सवा एकड़ भूमि पर 27 दिन के अंदर मूली तैयार कर मात्र 13 दिनों में डेढ़ लाख बिक्त्रस्ी की। उसके बाद उन्होंने जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद से संपर्क साधा और खेती की नई तकनीकों के बारे में जानकारी ली। बागवानी विभाग ने भी उसकी मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें दो एकड़ मटर का बीज निशुल्क उपलब्ध कराया साथ ही 16 हजार रुपए अनुदान दिया। बागवानी विभाग की सहायता से ही महबूब अब प्याज की फसल की तैयारियों में जुटा हुआ है। यही नहीं महबूब खेती के माध्यम से ही अपने चार लड़कों व तीन लड़कियों को भी उच्च शिक्षा दिला रहा है।
उन्होंने बताया कि बताया कि फिलहाल उन्होंने डेढ़ एकड़ में मिर्च लगाई हुई हैं जिनका अच्छा खासा भाव मंडी में मिल रहा है। साथ ही बताया कि जब उन्हें मंडी में उत्पादन का पूरा भाव नहीं मिलता तो भावांतर योजना के तहत भी उसकी पूर्ति की जाती है। उन्होंने बताया कि कृषि को अगर व्यवसाय की तरह किया जाए तो इसमें भी अच्छे अवसर हैं।
इस बारे में जिला बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद ने बताया कि उन्होंने स्वयं वहां जाकर महबूब की मेहनत और लगन देखी है, फिलहाल महबूब बरसाती प्याज की नर्सरी तैयार कर रहा है जिसके लिए उसे विभाग द्वारा अनुदान देने की तैयारी की जा रही है।