लू और भीषण गर्मी से नोएडा में मौत का मंजर भयावह, एक दिन में 14 ने दम तोड़ा
पोस्टमार्टम हाउस में मंगलवार को 23 और बुधवार को 28 शवों को लाया गया
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04 शव रखने के लिए ही पोस्टमार्टम हाउस में डीप फ्रीजर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा।
लू और रिकॉर्ड गर्मी के कारण नोएडा में एक दिन में 14 लोगों की मौत हो गई। बुधवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों की लाइनें लगी रहीं। वहीं, सेक्टर-94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर सामान्य दिनों की तुलना में तीन गुना अधिक शव लाए गए। आलम यह था कि डीप फ्रीजर की व्यवस्था न होने से शवों को खुले में जमीन पर रखना पड़ा। डॉक्टरों की टीमें देर रात तक पोस्टमार्टम करने में जुटी रहीं। सामान्य दिनों में एक डॉक्टर की ड्यूटी ही पोस्टमार्टम के लिए स्वास्थ्य विभाग लगाता है, लेकिन अब तीन डॉक्टरों की ड्यूटी यहां लगाई गई है।
पोस्टमार्टम हाउस की हालत को देखकर हर कोई सिहर गया। चार से अधिक शव रखने की व्यवस्था यहां नहीं है। ऐसे में खुले में ही शवों को रखकर छोड़ दिया गया। आवारा कुत्तों के इधर-उधर घूमने से शवों के क्षत-विक्षत होने की आशंका भी बनी रही। यह स्थिति तब थी जब सुबह नौ बजे से ही डॉक्टर लगातार पोस्टमार्टम करने में जुटे हुए थे। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 28 शव पोस्टमार्टम के लिए यहां लाए गए। मंगलवार को भी 23 पोस्टमार्टम यहां कराए गए थे। मंगलवार से ही मौत का आंकड़ा अचानक बढ़ा है। इसे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लू के प्रकोप से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, 28 में से सात शव सड़क दुर्घटना, चार फंदा लगाने और तीन हृदय गति रुकने की वजह से मौत से जुड़े हैं। बाकी 14 शव लू व गर्मी से जान गंवाने वालों के बताए जा रहे हैं। हालांकि, अभी भी लू से मौत के आंकड़े को स्वास्थ्य विभाग शून्य ही बता रहा है। नोडल अधिकारी डॉ. अमित कुमार सिंह का कहना है कि लू से मौत को लेकर सर्वे कराया जा रहा है। इससे सही आंकड़ा सामने आएगा। गर्मी से तबीयत खराब होने और मेडिकल हिस्ट्री होने पर इसे लू से मौत नहीं कहा जा सकता है।
आपदा के लिए तैयार नहीं पोस्टमार्टम हाउस
पोस्टमार्टम हाउस पर अव्यवस्थाओं की हकीकत भी सामने आ गई। शवों को रखने के लिए डीप फ्रीजर तक का इंतजाम नहीं है। कोल्ड रूम भी मौजूद नहीं है। ऐसे में शवों को खुले में ही छोड़ना पड़ा। पिछले दिनों पोस्टमार्टम हाउस में शव रखने की अव्यवस्था पर सवाल उठने के बाद चार में से एक डीप फ्रीजर को ठीक करा दिया गया था। इससे चार शव रखने की व्यवस्था ही हो पाई थी। जबकि आपदा प्रबंधन के नियमों के तहत यहां न्यूनतम 20 शव रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।
अचानक बिगड़े हालात, टीम जुटी
डिप्टी सीएमओ डॉ. जैसलाल का कहना है कि पोस्टमार्टम के लिए शव अचानक से बढ़े हैं। ऐसे में एक की जगह तीन डॉक्टर पोस्टमार्टम हाउस पर काम कर रहे हैं। सुबह 9 बजे से रात 10:30 बजे तक डाॅक्टर पोस्टमार्टम कर रहे हैं। पोस्टमार्टम हाउस पर डीप फ्रीजर की क्षमता बढ़ाने के लिए बजट अनुमति मिल गई है। जल्दी ही 14 शव रखने की व्यवस्था हो जाएगी। इसके अलावा सीएसआर फंड से एक एनजीओ की मदद से कोल्ड रूम भी यहां बनाया जाना है। इससे आपदा के समय शवों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।