जिला उपभोक्ता आयोग
पुरानी बीमारी की जानकारी छिपाई नहीं देगी बीमा कंपनी क्लेम
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। कार लोन के साथ लिए गए सुरक्षा बीमा में पुरानी बीमारी की सही जानकारी देना जरूरी है। बीमारी की जानकारी छिपाने पर बीमा कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने कैंसर की बीमारी छिपाकर ली गई बीमा पॉलिसी के बाद मृत्यु होने पर क्लेम खारिज करने के कंपनी के फैसले को सही ठहराया है। आयोग ने क्लेम दिलाने के लिए दायर वाद को निरस्त कर दिया।
दादरी क्षेत्र के बिसाहड़ा निवासी अनेक पाल सिंह के भाई नरेंद्र ने 28 जुलाई 2023 को कार खरीदी थी। कार के लिए महिंद्रा फाइनेंस कंपनी से 5.50 लाख रुपये का लोन कराया था। कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि ने उन्हें बताया कि सुरक्षा बीमा लेने पर मृत्यु की स्थिति में कार की कुल लोन राशि का बीमा कवर मिलेगा। इसके लिए उन्होंने 20,667 रुपये का प्रीमियम जमा कर बीमा पॉलिसी ली थी। 21 जून 2024 को किडनी फेल होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
पॉलिसी में मृतक ने भाई अनेक पाल सिंह को नामित किया था। मृत्यु के करीब दस दिन बाद बीमा कंपनी के कार्यालय पहुंचकर क्लेम फॉर्म और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए। 21 मार्च 2025 को बीमा कंपनी की ओर से उन्हें क्लेम के संबंध में पत्र मिला। इसमें पॉलिसी लेते समय बीमारी की जानकारी छिपाने का हवाला देते हुए क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी ने केवल जमा प्रीमियम की राशि वापस करने की बात कही। अनेक पाल सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जांच और उपलब्ध दस्तावेजों से पता चला कि मृतक ने सदस्यता फॉर्म में महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी छिपाई थी। पॉलिसी जारी होने से पहले ही वह कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। दोनों पक्षों के साक्ष्यों और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करने के फैसले को सही ठहराते हुए क्लेम दिलाने के लिए दायर वाद को निरस्त कर दिया।