यूपी एसटीएफ ने क्लोन चेक बनाकर बैंक से फर्जीवाड़ा करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। लखनऊ एसटीएफ एसपी त्रिवेणी सिंह के नेतृत्व में टीम ने दिल्ली से चार बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गिरोह केवल कारपोरेट, सोसायटियों और बड़ी संस्थाओं को निशाना बनाता था।
इस गिरोह ने अब तक करोड़ों के वारे-न्यारे किए हैं। आरोपियों से कई बैंकों के दो करोड़ रुपये के 20 चेक बरामद किए गए हैं। बताया गया है कि गिरोह के तार कई बैंक कर्मियों और अधिकारियों से जुड़े हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अल्फा-1 स्थित एक्सिस बैंक के शाखा प्रबंधक रवि कुमार तिवारी ने 25 अप्रैल को कासना थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने क्लोन चेक बनाकर आठ लाख रुपये की धोखाधड़ी होने की बात कही थी। एसटीएफ ने मामले में कार्रवाई करते हुए राहुल कुमार सिंह और विक्रम प्रताप सिंह को गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में गिरोह के बारे में सुराग लगा। मंगलवार को स्पेशल टॉस्क फोर्स ने गिरोह के मास्टरमाइंड डॉ. गगन सहगल निवासी पंचकूला हरियाणा, आशीष सूद निवासी बिहारी कॉलोनी शाहदरा (दिल्ली), धर्मेश कुमार गांधी विहार (दिल्ली) और बॉबी चौधरी निवासी टप्पल (अलीगढ़) को शाहदरा से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे एचडीएफसी, पीएनबी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे बैंकों में जाकर वहां खाताधारकों के चेक की फोटो खींच लेते थे और उसकी मदद से क्लोन चेक बना लेते थे। क्लोन तैयार करने के लिए कोरल ड्रॉ साफ्टवेयर का उपयोग करते थे।
दो करोड़ रुपये के फर्जी क्लोन चेक बरामद
खाताधारक का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट प्राप्त करने के बाद उसी बैंक की किसी शाखा में फर्जी खाता खुलवाते थे और उसके अकाउंट से संबंधित चेक और पासबुक बना लेते थे। इसके बाद फर्जी खाता धारक का माइक्रो कोड, नाम और अकाउंट नंबर केमिकल से डिलीट कर उसमें संस्था वाले चेक बुक का नाम, माइक्रो कोड नंबर अकाउंट नंबर डालकर लाखों रुपये की रकम अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे।
दो करोड़ रुपये के फर्जी क्लोन चेक बरामद
एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए दो करोड़ के क्लोन चेक बरामद किए हैं। वहीं, लैपटॉप में फर्जी चेकों के क्लोन बनाने की जानकारी भी मौजूद थी। पुलिस ने इनके पास से एक वैगनऑर कार, दो लैपटॉप, दस मोबाइल, पांच चेक कई बैंकों की, 20 क्लोन चेक कई बैंकों के और चार हजार रुपये नगद बरामद किए हैं।
गिरोह ऐसे सरकारी संस्थानों, निजी संस्थाओं को निशाना बनाते थे, जिनके ट्रांजेक्शन की जानकारी मोबाइल पर एसएमएस या मेल द्वारा नहीं आती है। ऐसे कई मामलों में संस्थानों को अब तक धोखाधड़ी का पता भी नहीं लग पाया है। गिरोह के तार कई अन्य बैंक कर्मियों, अधिकारियों और अन्य गिरोहों से जुड़े हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। -त्रिवेणी सिंह, एसपी, एसटीएफ