प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से रामगढ़ पुलिस संदेह के घेरे में
मेवात।
मेवात के कोलगांव निवासी रकबर की हत्या का मामला पुलिस, गोरक्षादल और प्रत्यक्षदर्शियों के बीच उलझकर रह गया है। राजस्थान सरकार ने आईजी एनआरके रेड्डी की अगुवाई में चार वरिष्ट अधिकारियों की टीम गठित कर जांच सौंप दी है लेकिन जिस तरह से गोरक्षादल और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान खुलकर सामने आ रहे हैं उससे जाहिर है कि रकबर को पीटने वाले गोरक्षादल के सदस्य हैं और उसकी मौत की वजह रामगढ़ पुलिस। इसमें कितनी सच्चाई है यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा।
गोरक्षादल रामगढ़ के नवल किशोर शर्मा का कहना है कि घटना वाले दिन उसने पुलिस को रात 12 बजकर 41 मिनट पर दो गायों के साथ पकडे़ गए एक कथित गोतस्कर रकबर की सूचना दी। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उसे साथ ले गई। पुलिस ने उसके सामने ही थाने में मारपीट की। वहीं एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी देव करण का कहना है कि पुलिस वाले उसे (रकबर) लात-घूसों से मार रहे थे। वहीं चाय बनाने वाले लाल चंद शर्मा ने बताया कि पुलिस वालों ने उससे चार चाय बनवाई और पीकर चले गए। गोशाला मैनेजर कपूर चंद जैन का कहना है कि उसके पास पुलिस वालों का देर रात 3 बजकर 12 मिनट पर फोन आया कि दो गाय लेकर आ रहे हैं। तीन बजकर 26 मिनट पर पुलिसकर्मी गोशाला पहुंचे। रामगढ़ अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर हसन अली ने बताया कि तड़के करीब चार बजे पुलिस वाले रकबर को लाए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।