अदालत ने दिल्ली पुलिस की जांच पर असंतोष जताते हुए दाती महाराज और उनके सौतेले भाइयों पर दुष्कर्म के आरोप मामले में दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस की जांच उचित नहीं है। इसके अलावा, मामले में सीबीआई जांच जारी है और उसी के बाद सुनवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 1 अक्तूबर को यह चार्जशीट दाखिल की थी।
साकेत जिला अदालत की सीएमएम पूजा तलवार ने पुलिस की जांच पर नाराजगी जताते हुए शनिवार को कहा कि जांच में कई अहम पहलुओं को दरकिनार कर दिया गया है। ऐसे ठोस तथ्य नहीं हैं, जिनके आधार पर संज्ञान लिया जा सके। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने जांच पर संदेह जताते हुए मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया है। ऐसे में संज्ञान लेने का कोई औचित्य नहीं है।
हाईकोर्ट ने पीड़िता की याचिका पर सुनवाई के बाद केस की जांच सीबीआई को देते हुए विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। पीड़िता का आरोप था कि दिल्ली पुलिस दाती मदनलाल राजस्थानी के प्रभाव के कारण मामले में लीपापोती कर रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से उसकी जान पर लगातार खतरा बना हुआ है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि दाती महाराज और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने लायक साक्ष्य नहीं मिले हैं। यह चार्जशीट केवल पीड़िता के पुलिस और कोर्ट को दिए बयान के आधार पर दाखिल की गई है। इसमें आरोपियों, उनके सहयोगियों और अन्य लोगों मोबाइल रिकॉर्ड की फोरेंसिक रिपोर्ट है।
पीड़िता का आरोप है कि वह 2005 में दाती महाराज के संपर्क में आई थी। दाती उसके कॉलेज का खर्च भी उठाता था। दो साल पहले चरण सेवा के नाम पर 9 जनवरी 2016 को दाती महाराज ने फतेहपुर बेरी स्थित आश्रम में शनि अमावस्या को उससे दुष्कर्म किया। इस बाबत पीड़िता ने दस जून 2018 को दाती महाराज और उसके भाइयों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद पीड़िता ने सीबीआई जांच के लिए 17 जुलाई को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।