यूपी (गाजियाबाद), हरियाणा और राजस्थान के ध्यानार्थ
सरकारी नौकरी के नाम पर 200 युवाओं से ठगी
गिरोह के तीन बदमाशों को अपराध शाखा ने दबोचा
ठगी के शिकार ज्यादातर युवा दिल्ली, यूपी, बिहार, हरियाणा और राजस्थान के
फर्जी नियुक्ति पत्र, खाली आईकार्ड और कागजात समेत काफी सामान बरामद
एक आरोपी बीटेक और दूसरा डीयू से ग्रेजुएट, दो और आरोपियों की तलाश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बेरोजगार युवकों को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर ठगी करने वाले गैंग के तीन बदमाशों को अपराध शाखा ने दबोचा है। आरोपियों की पहचान शशि भूषण उर्फ मनीष (26), संदीप सिधाना (36) और शीतल कुमार (30) के रूप में हुई है। पुलिस की मानें तो आरोपी 200 से अधिक युवाओं से मोटी रकम ठग चुके हैं। ठगी के शिकार ज्यादातर युवा दिल्ली, यूपी, बिहार, हरियाणा और राजस्थान के हैं। आरोपियों के पास से कई विभागों के फर्जी नियुक्ति पत्र, रेलवे के खाली आईकार्ड, पीड़ितों के कागजात, लैपटॉप, 10 मोबाइल, एक कार व अन्य सामान बरामद हुआ है। आरोपी संदीप डीयू से ग्रेजुएट है, जबकि शीतल ने बीटेक कर रखी है। पुलिस को दो और आरोपियों की तलाश है।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन ने बताया कि 3 जनवरी को सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर छह लाख रुपये की ठगी की शिकायत मिली थी। एक-एक चार युवाओं ने कुल 24 लाख रुपये ठगने की शिकायत दी। सभी को रेलवे, एफसीआई (फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया), मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस, पोस्ट ऑफिस, यूनियन बैंक व अन्य जगह नौकरी का झांसा दिया गया। छानबीन के बाद टीम का गठन किया गया। कई माह की पड़ताल के बाद पता चला कि आरोपी मनीष व उसके साथी इस घटना के पीछे हैं। पुलिस ने 5 अगस्त को पटना, बिहार से मनीष को दबोच लिया।
दिल्ली लाकर उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। उससे पूछताछ के बाद 8 अगस्त को साकेत से संदीप और उसी दिन शीतल को साकेत मेट्रो स्टेशन से दबोचा गया। पुलिस को इनके दो अन्य साथी संजय और मनीष के छोटे भाई मनोज की तलाश है।
प्लेसमेंट एजेंसियों से जुटाते थे जानकारियां
आरोपियों ने बताया कि वह विभिन्न प्लेसमेंट एजेंसियों से जुड़े थे। वहां से बेरोजगार युवाओं की जानकारियां जुटाकर युवाओं से संपर्क करते थे। मनीष व उसका भाई मनोज युवाओं को सरकारी नौकरी दिलवाने के सपने दिखाते थे। दोनों संदीप को अपना बॉस बताकर युवाओं को उनसे मिलवाते थे। विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलवाने की बात कर युवाओं से छह लाख रुपये में बात तय होती थी। शुरुआत में 50 हजार रुपये लेकर मनीष नौकरी के लिए फॉर्म भरता था। गाजियाबाद निवासी संजय नामक युवक नॉर्दर्न रेलवे अस्पताल में पीड़ितों का मेडिकल करवाता था। बाद में उनको मेडिकल क्लीयरेंस सर्टिफिकेट देकर अस्थायी आईकार्ड देकर बाकी के 5.50 लाख रुपये ले लिए जाते थे।
गाजियाबाद में कराते थे ट्रेनिंग
आरोपियों ने बताया कि वह दिखावे के लिए पीड़ितों की गाजियाबाद में ट्रेनिंग भी कराते थे। संजय नामक आरोपी पीड़ितों को एक ऑफिस में ले जाकर वहां कंप्यूटर चलाने की ट्रेनिंग देता था। सब कुछ होने के बाद पीड़ित जब सरकारी ऑफिस ज्वाइन करने जाते थे, तो उन्हें ठगी का पता चलता था। शिकायतकर्ता केशव के मुताबिक, आरोपियों ने उसके भाई की रेलवे में नौकरी लगवाने का झांसा देकर छह लाख रुपये ठगे थे।
खुद की नहीं लगी थी सरकारी नौकरी
गैंग के सरगना मनीष ने बताया कि वह कई साल पूर्व 12वीं करने के बाद दिल्ली में सरकारी नौकरी की तलाश में आया था, लेकिन उसकी नौकरी नहीं लगी। इस बीच उसकी मुलाकात संदीप और शीतल से हुई। दोनों सरकारी नौकरी लगवाने के फर्जी धंधे में लिप्त थे। मनीष उनके साथ इसी धंधे में शामिल हो गया। वहीं संदीप ने बताया कि उसने खालसा कॉलेज से ग्रेजुएशन की है। उसकी गलत आदतों की वजह से उसके परिवार ने उसे घर से निकाला हुआ है। शीतल ने डॉ. एमजीआर यूनिवर्सिटी चेन्नई से बीटेक की हुई है। शीतल के पिता मधुबनी बिहार में एक बैंक में वरिष्ठ मैनेजर हैं।