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तीन तलाक देने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज

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नई दिल्ली। अदालत ने पत्नी को तीन तलाक देने के आरोपी शख्स को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि इस तुरंत की तलाक देने की प्रथा के कारण मुस्लिम महिलाओं को कभी भी घर से निकाले जाने का डर सताता रहता है। मामले में आरोपी शराफत हुसैन ने अपनी पत्नी को फोन पर तीन तलाक दिया था। इसके बाद पत्नी ने उसके खिलाफ 2019 में संबंधित कानून में मुकदमा करवाया था।
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तीस हजारी अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लॉ ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस प्रथा के कारण मुस्लिम महिलाएं सालों से घर से निकाले जाने के डर में जी रही है। अगर उनका पति सालों पुरानी शादी को तीन तलाक कहकर तोड़ने का फैसला कर लेता है।
अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि आरोपी की पत्नी ने अपने मोबाइल में उस बातचीत को रिकार्ड और सेव किया हुआ है जिसमें पति ने उसे तीन तलाक दिया था। अदालत ने कहा रिकार्डिंग पर विशेषज्ञों की रात जानने के लिए आरोपी के आवाज के नमूने लेने जरूरी हैं।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि इस पृष्ठभूमि में वह आरोपी को जमानत देने की इच्छुक नहीं हैं। ये बात उन्होंने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए 30 जुलाई के अपने फैसले में कही।
याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कहा कि आरोपी उसका व उसके डेढ़ माह के बच्चे का खर्च नहीं दे रहा है और उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है। वहीं आरोपी के वकील माधव चौधरी ने कहा कि उनके मुवक्किल ने कभी अपनी पत्नी को तलाक नहीं दिया और वह अपनी गृहस्थी को बचाना चाहता है। वकील ने कहा इस शादी को बचाया जा सकता है, अगर पीड़िता अपने पति के साथ रहने के लिए तैयार है।
दूसरी ओर सरकारी वकील ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अगर आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह 24 अगस्त 2021 को पुलिस को अपनी आवाज के नमूने नहीं देगा। - एजेंसी
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