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Noida News: तलाकशुदा पत्नी को पति की संपत्ति में नहीं मिलेगा हक

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(अदालत से)
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- नोएडा कोर्ट ने खारिज किया मकान पर दावा
-मकान को लेकर 11 साल चली लड़ाई में सास के पक्ष में फैसला
-पत्नी और बेटी ने खुद को वारिस घोषित करने की मांगी थी डिक्री
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने ग्रेटर नोएडा के म्यू-1 सेक्टर स्थित मकान पर स्वामित्व के विवाद में शनिवार को अहम फैसला सुनाते हुए आईना कटियार और उनकी बेटी अंशिका का वाद सव्यय (खर्च सहित) निरस्त कर दिया। यह मुकदमा 2015 से चल रहा था।
वादिनी आईना कटियार ने अपनी नाबालिग बेटी अंशिका के साथ अदालत में वाद दायर कर मांग की थी कि उनकी सास विद्यावती को मकान बेचने, गिरवी रखने, किराये पर देने या उन्हें बेदखल करने से रोका जाए। साथ ही उन्होंने खुद को दिवंगत शैलेंद्र कुमार का कानूनी उत्तराधिकारी घोषित करने की मांग की थी। दावा था कि आईना का विवाह 2007 में शैलेंद्र से हुआ था और वे मोजर बेयर कंपनी में इंजीनियर थे। शैलेंद्र ने 2013 में यह मकान 26.50 लाख रुपये में खरीदा था। बीमा पॉलिसी में आईना नॉमिनी थीं। नवंबर 2014 में डेंगू से शैलेंद्र की मृत्यु हो गई। आईना का कहना था कि उन्हें पति की मृत्यु के बाद पता चला कि उनके पति ने चुपचाप तलाक ले लिया था, जबकि वे अंत तक साथ रहीं।
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शैलेंद्र की मां विद्यावती ने दावे को गलत बताया। उनके अनुसार आईना ने खुद 2008 में तलाक का मुकदमा किया था। जिसमें 31 अगस्त 2009 को विवाह-विच्छेद की डिक्री पारित हुई। उन्होंने अंशिका को शैलेंद्र की संतान मानने से भी इनकार किया।अदालत ने पाया कि आईना ने अपने वाद-पत्र में खुद को तलाकशुदा पत्नी स्वीकार किया है, जबकि तलाक की डिक्री रद्द कराने की कार्यवाही लंबित होने का कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया। तलाक के बाद पत्नी को पति की स्वअर्जित संपत्ति पर विरासत का अधिकार नहीं रहता। जब मुख्य अनुतोष नहीं मिल सकता तो परिणामी अनुतोष भी नहीं दिया जा सकता।
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