नई दिल्ली। अदालत ने किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी नांगलोई थाने में दर्ज सभी एफआईआर अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया है। महानगर दंडाधिकारी अभिनव पांडे ने कहा कि जिन मामलों में ऐसा न करने की कोर्ट को जानकारी दी गई है, उसके अलावा सभी एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड होनी चाहिए ताकि आरोपियों को प्रतिनिधियों को इसके लिए भटकना न पड़े।
हालांकि अदालत ने अरेस्ट मेमो, रिमांड पेपर तथा रिमांड अर्जी आरोपी को मुहैया करवाने से इनकार कर दिया। अदालत ने जांच के दौरान ये दस्तावेज आरोपी को मुहैया करवाने का कोई आधार नहीं है। आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के बाद ही ये दस्तावेज आरोपी को दिए जा सकते हैं।
अदालत ने नौ फरवरी के अपने आदेश में कहा कि जमानत पर प्रभावी तरीके से बहस के लिए आरोपियों का एफआईआर के आरोप व उनका आधार जानना जरूरी है। इसलिए आरोपी को एफआईआर की कॉपी मुहैया करवाना न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत तथा निष्पक्ष सुनवाई तथा कानूनी अधिकारों के इस्तेमाल के लिए जरूरी है।
इस संबंध में हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन होना चाहिए और एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड की जानी चाहिए। अदालत ने संबंधित डीसीपी को देरी का कारण बताने का निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए 11 फरवरी की तारीख तय की है। अदालत ने ये निर्देश एक आरोपी दीपक की याचिका पर दिया है। उसने कहा कि उसे गिरफ्तार करने के बाद भी एफआईआर की कॉपी नहीं दी गई। - एजेंसी