जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जेवर में 2010 में एक घर में घुसकर महिला को गोली मारने के मामले में सत्र अदालत ने शुक्रवार को तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने जांच अधिकारी की भूमिका पर सख्त टिप्पणी की और उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति जिलाधिकारी को भेजने के निर्देश दिए।
मामला अक्टूबर 2010 की रात का है। वादी नेम सिंह की तहरीर के अनुसार रात को चार लोग उनके घर में घुसे। एक ने साले प्रवीन को डंडा मारकर नाम पूछा। शोर मचाने पर तमंचाधारी ने नेम सिंह की पत्नी राकेशी के पेट में गोली मार दी। जेवर थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लूट और हत्या के प्रयास में मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में पुलिस ने नईमुद्दीन, पप्पू और कयूम के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। अभियोजन ने आठ गवाह पेश किए, लेकिन सबसे अहम गवाह ही पक्ष में नहीं रहे। अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ एकमात्र आधार कथित इकबालिया बयान था। जो रबुपुरा थाने की हवालात में दूसरे मामले में बंद रहने के दौरान दर्ज किया गया। इस मामले में न तो विधिवत गिरफ्तारी दर्शाई गई, न कोई बरामदगी हुई, न कोई अन्य पुष्टिकारक साक्ष्य जुटाया गया। रबुपुरा में बरामद तमंचे की इस केस में कोई फर्द भी दाखिल नहीं की गई। गवाह के बयान में लूट या लूट के प्रयास का जिक्र नहीं था, फिर भी धारा 393 में आरोप-पत्र भेजा गया जो अत्यन्त गंभीर तथा दुर्भाग्यपूर्ण है।