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Delhi News: फरिश्ते योजना पर विवाद, एलजी ने लिखा सीएम को पत्र, कहा- योजना दिल्ली सरकार के नियंत्रण में

Sat, 16 Dec 2023 08:29 PM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

एलजी ने पत्र में लिखा कि स्वास्थ्य मंत्री ने 23 अक्तूबर को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सचिव डॉ. एसबी दीपक कुमार और (पूर्व डीजीएचएस) डॉ. नूतन मुंडेजा को निलंबित करने व फरिश्ते योजना को रोकने के लिए इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। मंत्री के प्रस्ताव को एनसीसीएसए को भेजे जाने के लिए लिखा है।
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एलजी वीके सक्सेना और सीएम अरविंद केजरीवाल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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फरिश्ते योजना को लेकर हुए विवाद के बीच उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शनिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा है कि योजना दिल्ली सरकार के नियंत्रण में है। स्वास्थ्य और वित्त विभाग इसे चलाते हैं। इस योजना को लेकर सरकार गलत आरोप लगाकर जिम्मेदारी से भाग रही है। सरकार के आरोप पर ही सर्वोच्च न्यायालय ने एलजी कार्यालय को नोटिस जारी किया।
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एलजी ने पत्र में लिखा कि स्वास्थ्य मंत्री ने 23 अक्तूबर को पत्र लिखकर स्वास्थ्य सचिव डॉ. एसबी दीपक कुमार और (पूर्व डीजीएचएस) डॉ. नूतन मुंडेजा को निलंबित करने व फरिश्ते योजना को रोकने के लिए इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। मंत्री के प्रस्ताव को एनसीसीएसए को भेजे जाने के लिए लिखा है।

नियम के तरह इसे मुझे भेजने की जरूरत नहीं है। मंत्री ने अपने नोट में कुछ निजी अस्पतालों को लंबित बिलों का भुगतान न करने जैसे कुछ आरोप लगाए हैं, जिन्होंने फरिश्ते योजना के तहत सड़क दुर्घटना के पीड़ितों का इलाज किया था। इसी बीच दिल्ली सरकार ने कोर्ट में याचिका भी लगा दी। मामला कोर्ट में होने पर इसे लेकर कोई आदेश या निर्णय लेना उचित नहीं है।
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चल रहीं हैं योजनाएं, जारी हुई राशि

अधिकारियों ने बताया कि उक्त योजना 2011 के एक कैबिनेट निर्णय से गठित सोसाइटी दिल्ली आरोग्य कोष का हिस्सा है। इसके घटकों में गरीब रोगियों को वित्तीय सहायता, निशुल्क हाई एंड रेडियोलॉजिकल डायग्नोस्टिक परीक्षण योजना, कैशलेस निर्दिष्ट सर्जरी योजना, सड़क यातायात दुर्घटना योजना और कैशलेस डायलिसिस योजना शामिल हैं। योजनाएं अभी भी जारी हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान फरिश्ते योजना के तहत लाभार्थियों की कुल संख्या 3698 थी और वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 31 अक्टूबर तक यह 3604 हो गई। निजी अस्पतालों को वित्त वर्ष 2022-23 में इसके लिए 4,85,46,97 रुपये और इस वर्ष अक्टूबर तक इसके लिए ही 3,54,35,230 रुपये का भुगतान किया गया। प्रथमदृष्टया ये आंकड़े न तो योजना को रोकने का संकेत देते हैं और न ही ये मंत्री के आरोप को सही बताते हैं।
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