नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम के मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। इस मामले में युवक को 2017 में एक नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पॉक्सो अधिनियम के मामलों में पीड़िता के बयान और सहमति का कोई मूल्य नहीं है।
मामला रणहोला पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है । शिकायत में पीड़िता के पिता ने 17 अक्टूबर, 2017 को आरोप लगाया कि उनकी 14 वर्षीय बेटी 16 अक्टूबर को घर से गायब हो गई थी। 5 नवंबर को पीड़िता अपने पिता के साथ पुलिस स्टेशन पहुंची और मेडिकल जांच में बताया कि वह एक अनजान महिला के साथ बिहार गई थी, फिर दिल्ली लौटकर आरोपी रसूल आजम से मिली, जिसने उसे अपने घर ले जाकर सहमति से शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि, धारा 164 सीआरपीसी के बयान में उसने आरोप लगाए, जिसके आधार पर धारा 376 आईपीसी जोड़ी गई। ट्रायल कोर्ट ने 20 मार्च, 2023 को रसूल को दोषी ठहराया और 15 अप्रैल, 2023 को सजा सुनाई। ब्यूरो