नूंह (अंतराम खटाना)। लोगों की शिकायतों को तुरंत संबंधित अधिकारियों द्वारा समाधान किया जाए, इसके लिए प्रदेश में सीएम विंडो की शुरुआत 25 दिसंबर 2014 को की गई थी। लेकिन, अधिकारियों की सुस्ती के कारण जिले में शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा है। लोग कार्यालयों के चक्कर लगाते रहते हैं। ऐसे में लोगों को इस पर से विश्वास भी उठ रहा है। सीएम विंडो मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ड्रीम प्रोजेक्टों में से एक है। इसे भ्रष्टाचार पर नकेल कसने और लोगों को समय पर न्याय देने के लिए शुरू किया गया था। लेकिन, शिकायतों का समाधान तो दूर उसका निपटारा भी नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारी शिकायत का समाधान दर्शाकर बंद कर देते हैं। लेकिन, वास्तव में समस्या का समाधान होता नहीं है।
शिकायतकर्ता ऊधम सिंह, इमरान खान, शौकीन, नसीम अहमद और सुखबीर आदि ने बताया कि उन्होंने कई मामलों के संबंध में सीएम विंडो पर शिकायतें दर्ज कराई थी। रजिस्ट्रेशन दर्ज होने की सूचना भी फोन पर पहुंच गई थी। कुछ दिन बाद उनके पास एक नंबर से फोन आया कि उनकी समस्या का समाधान हो चुका है। लेकिन, उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ था। इन लोगों को सीएम विंडो पर शिकायतें करने से पूर्व न्याय की उम्मीद थी, लेकिन समाधान के नाम पर ठोस कदम नहीं उठाए गए।
अधिकारियों पर मिलीभगत कर निपटारा करने का आरोप
नूंह जिले में रोजाना 10 से 15 शिकायतें आती हैं। एक माह में औसतन 250 से 300 शिकायतें आती हैं। जिले में अब तक 6500 शिकायतें आ चुकी हैं। इनमें से करीब 150 शिकायतें लंबित हैं। वहीं, इनमें से आधी शिकायतों का जवाब सीएम हाउस भेजा गया है। वर्ष 2018 में 1265, 2019 में 1058, 2020 में करीब 800 और इस वर्ष अब तक सैकड़ों शिकायतें सामने आई हैं। इनमें सबसे अधिक शिकायतें पंचायत विभाग से संबंधित हैं। इसके अलावा जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, बिजली निगम, पुलिस, बैंक, समाज कल्याण, नगरपालिका, रोडवेज और जिला प्रशासन से संबंधित भी काफी शिकायतें हैं। इन शिकायतों को संबंधित विभागों में भेज दिया जाता है। कुछ मामलों में शिकायतों का निपटारा नहीं होने पर उपायुक्त के पास भी भेजी जाती हैं। सीएम विंडो में समस्याओं का समाधान बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा है। आरोप है कि कई शिकायतों में अधिकारी मिलीभगत कर खुद निपटारा कर लेते हैं।
अजीब तरह की आती हैं शिकायतें
कई बार सीएम विंडो पर लोगों द्वारा गांव के रास्तों में अवैध रूप से भैंसों के बांधने, बकरी के चोरी होने और बंदरों के उत्पात मचाने की शिकायतें आती हैं। इस कारण अधिकारियों के सामने इन शिकायतों को लेकर भी परेशानी है। वहीं कुछ ऐसी शिकायतें हैं, जिसका तुरंत समाधान नहीं हो सकता। इनमें सड़कों का निर्माण, भ्रष्टाचार के आरोप, बुनियादी सुविधा दुरुस्त करने की मांग आदि शामिल हैं। इन शिकायतों का समाधान एक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है।
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प्रशासन द्वारा हर सप्ताह सीएम विंडो की शिकायतों के समाधान के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की जाती है। ऐसे में पूरा प्रयास रहता है कि सीएम विंडो की शिकायतों का समय पर समाधान हो। अगर किसी की शिकायत का समाधान नहीं होता है तो वह कार्यालय में संपर्क कर सकता है।
धीरेंद्र खड़गटा, उपायुक्त नूंह
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लोगों की शिकायतों को अधिकारी समय पर समाधान करें। जनहित से जुड़ी समस्याओं पर प्रशासनिक अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
वसीम अहमद, जजपा जिलाध्यक्ष
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प्रदेश सरकार ने लोगों के हितों को ध्यान में रखकर सीएम विंडो को शुरू किया है। इस बारे में अधिकारियों से बात की जाएगी।
नरेंद्र पटेल भाजपा जिलाध्यक्ष
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लोगों को इसका सदुपयोग करना चाहिए। सच्चाई के साथ शिकायतें करनी चाहिए। कई शिकायतों के निपटारे में देरी होती है। इस ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
अरशद टांई, चेयरमैन