पलवल। नरेगा घोटाले को उजागर करने के लिए एक युवक ने 14 बार शिकायत की। नंगला कानपुर निवासी वासिद ने तीन बार सीएम विंडो, पांच बार जिला उपायुक्त, दो बार सीइओ जिला परिषद, एसडीएम होडल, बीडीपीओ हसनपुर, लोकपाल, स्टेट विजिलेंस को शिकायत दी। दो बार लगाई आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार 28 फर्जी बिलों के जरिये काम होना बताया गया। एक-एक रास्ते को दो-दो, तीन-तीन बार नाम बदलकर कागजों में बनाकर करोड़ों रुपये हड़प लिए गए। गांव गुलावद में 72 काम दिखाकर 95.35 लाख, गांव रामगढ़ में 32 काम दिखाकर 46.44 लाख व गांव भिडूकी में 27 काम दिखाकर 29.75 लाख रुपये निकाले गए, जबकि मौके पर रास्तों में एक रुपये का भी काम नहीं हुआ।
शिकायतकर्ता वासिद ने बताया कि उसके गांव नंगला कानपुर में सारे रास्ते कच्चे पड़े हुए हैं। रास्ता बनाने के लिए उसने अधिकारियों से मुलाकात की, तो पता चला कागजों में सारे रास्ते बनाए जा चुके हैं। दिसंबर 2021 में वह जिला परिषद के सीईओ को मिला, परंतु कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिला तो 14 व 21 फरवरी तथा 14 मार्च को सीएम विंडों पर शिकायत की। 14, 15, 17 व 21 फरवरी को लगातार जिला उपायुक्त को शिकायत दी। इस दौरान खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी हसनपुर व एसडीएम होडल को भी शिकायत दी गई। इस बारे में नरेगा लोकपाल को शिकायत दी तो जांच की उम्मीद बंधी है। उसने छह अप्रैल को स्टेट विजिलेंस को भी मामले की शिकायत दी है।
60 दिन बाद दी गई आरटीआई के तहत मांगी जानकारी
वासिद ने बताया कि पांच जनवरी 2022 को उसने जिला परिषद कार्यालय में आरटीआई के तहत गांव में हुए कार्यों की जानकारी मांगी। अधिकारी जानकारी देने के बजाय राजीनामे का दबाव बनाते रहे। उच्च अधिकारियों से बात करने के नाम पर गुमराह करते रहे। 60 दिन बाद उसे जानकारी दी तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आरटीआई में कुल 28 रास्ते बने दिखाए गए। सभी रास्तों के भुगतान के लिए अमन बीएमएस एंड कॉन्ट्रेक्टर के बिल दिखाए गए हैं। अक्टूबर 2021 में बिलों को भुगतान हो चुका है, जबकि रास्तों पर एक रुपये का भी काम नहीं हुआ है।
स्टेट विजिलेंस टीम प्रभारी का तबादला
नरेगा घोटाले की जांच के लिए चंडीगढ़ से टीम आई थी। रिपोर्ट से नाखुश अधिकारियों ने टीम प्रभारी ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल कुमार दून का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया। उनके स्थान पर अब निर्मल नागर मामले की जांच करेंगे। अनिल कुमार दून को संयुक्त परिवहन आयुक्त (सड़क सुरक्षा) हरियाणा लगाया गया है। बताया गया कि जांच में बड़े अधिकारियों की जगह जेई और एसडीओ को जिम्मेवार बताया गया था। इससे नाराज अधिकारियों ने टीम को दोबारा जांच करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को टीम जांच के लिए दोबारा पलवल आएगी।