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सीएमओ पद की साख बचाने को छीने वित्तीय अधिकार

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जिला और सीएमओ पद की साख बचाने को छीने केवल वित्तीय अधिकार
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ग्रेटर नोएडा। सीएमओ का पद गंवाने वाले डॉ. अनुराग भार्गव के बाद एपी चतुर्वेदी भी शासन के मापदंड पर खरे नहीं उतरे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, चतुर्वेदी ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए भले ही खुद को पीछे कर लिया हो, लेकिन असली कारण चतुर्वेदी द्वारा जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को नहीं संभाल पाना बताया जा रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डॉ. चतुर्वेदी ने प्रतिरक्षण कार्यक्रम को प्रदेश में अच्छे मुकाम पर पहुंचाया। उनकी प्रतिभा को देखते हुए ही शासन ने डॉ. अनुराग को हटाने के बाद सीएमओ की कमान उनके हाथों में सौंप दी थी, लेकिन जिम्मेदारी संभालने के कुछ दिनों के भीतर ही वह कोरोना नियंत्रण में पिछड़ने लगे। मीडिया के साथ संवाद उनका बेहद खराब रहा। शासन को रिपोर्ट सौंपने में भी उनका ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब रहा। शासन उनकी हर रिपोर्ट लेता रहा। सूत्रों ने बताया कि डॉ. चतुर्वेदी ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, लेकिन कुछ दिनों में ही दूसरे सीएमओ को हटाने में खुद शासन ने परहेज किया। विकल्प के रूप में महामारी में कुशल अफसरों की कुंडली खंगाली गई। मौजूदा सीएमओ और कार्यभार संभाल चुके अफसरों की स्थिति देखी। सभी में डॉ. दीपक ओहरी फिट बैठे। हालांकि, डॉ. दीपक ओहरी एसीएमओ बनने को तैयार नहीं थे। बाद में शासन ने उनका कद बढ़ाते हुए वित्तीय प्रभार सौंप दिया। सीएमओ का आधिकारिक प्रभार अभी भी डॉ. एपी चतुर्वेदी संभाल रहे हैं। वहीं, डॉ. दीपक ने रविवार सुबह 10 बजे पदभार संभाल लिया। उन्होंने जिले की वर्तमान स्थिति की जानकारी संबंधित लोगों से मांगी है। उन्होंने कहा कि जिले में कोरोना का प्रसार रोकने के लिए व्यापक रणनीति बनाई जाएगी। इस संबंध में सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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