ग्रेटर नोएडा। चिटहेरा गांव में पट्टे की भूमि को हड़पने के लिए 12 से अधिक लोगों पर पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों से फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए थे। विरोध करने पर भूमाफिया पुलिस से मिलकर उसे जेल भिजवा देते थे। इनमें चार पर दुष्कर्म और 8 पर लूटपाट समेत दूसरे संगीन आरोप लगाए गए थे, हालांकि बाद में सभी न्यायालय ने बरी कर दिए थे।
ग्रामीणों ने बताया कि चिटहेरा गांव के पट्टे में हेराफेरी के मामले की जांच प्रशासन के द्वारा अपर जिलाधिकारी स्तर से कराई जा रही है। कई माह से जांच चल रही है लेकिन प्रशासन खानापूर्ति करने में लगा है। उत्तराखंड के एसटीएफ ने एक मामले का खुलासा करके चिटहेरा की 63 करोड़ रुपये की जमीन को जब्त करने की कार्रवाई की है, लेकिन अभी जमीन को कागजों में ही कुर्क किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि चिटहेरा गांव में पट्टे की जमीनों में हेराफेरी करके राजस्व दस्तावेज में जमीन का रकबा बढ़ाने, पट्टेदारों से जमीन को बिना पैसा दिए अपने नाम कराने का खेल खेला गया था। जमीन देने का विरोध करने पर चिटहेरा के चार पट्टेदारों पर पंजाब में दुष्कर्म के मुकदमे दर्ज कराए गये। यूपी के साहिबाबाद, दिल्ली और राजस्थान में भी आठ लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। कई लोगों को 4 से 5 माह तक जेल में रहना पड़ा, बाद में न्यायालय से बरी किया गया।
कई बार पीड़ितों ने जिला प्रशासन और पुलिस के आला अफसरों से शिकायतें की तो उनके सुनवाई नहीं की गई। दुष्कर्म के फर्जी मामले में पंजाब में जेल गए एक पीड़ित ने बताया कि भूमाफिया का सहयोग जिला प्रशासन, तहसील और पुलिस करती रही है। तहसील में जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी करके जमीनों के रकबा बढ़ाकर भी सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान किया गया है। जांच के नाम पर प्रशासन मामले को अभी भी दबाने में जुटा है।