फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महात्मा बुद्ध के खिलाफ टिप्पणी पर कोर्ट में दायर किया वाद

विज्ञापन
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में हैपीनेस सेंटर के उद्घाटन पर पद्म विभूषण रामभद्राचार्य द्वारा महात्मा बुद्ध पर की गई अभद्र टिप्पणी पर ग्रेनो निवासी अधिवक्ता ओमप्रकाश मधुर ने जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अधिवक्ता का कहना है कि इससे भगवान महात्मा बुद्ध की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा है। वहीं, उनके अनुयायियों की आस्था को भी ठेस पहुंची है।
विज्ञापन

जिला न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी ने बताया कि मामले में अधिवक्ता ओमप्रकाश मधुर की ओर से वाद दायर किया गया है। अधिवक्ता का कहना है कि महात्मा बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक और प्रणेता रहे हैं। बौद्ध धर्म के अनुयायी उनको भगवान मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं। पूरी दुनिया में महात्मा बुद्ध के करोड़ों समर्थक हैं। अभद्र टिप्पणी से करोड़ों अनुयायियों की आस्था को ठेस पहुंची है। इसके विरोध में वह सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
फेसबुक, व्हाट्स एप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी विरोध जारी है। रामभद्राचार्य महाराज के इस कृत्य से देश की संप्रुभता को भी ठेस पहुंचा है। उनका कहना है कि इससे स्पष्ट है कि वह देश में अशांति, आतंक, धार्मिक व सांप्रदायिक दंगे फैलाने की साजिश के सूत्रधार हैं। यह कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम 2019 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। ऐसे में उन्होंने अभियुक्त को न्यायालय में तलब कर विधि के अनुसार दंडित किए जाने का आदेश पारित करने का निवेदन किया है।
विज्ञापन

रामजन्म होते ही श्रद्धालुओं ने किया नृत्य
थोरा बंकापुर में चल रही श्रीरामकथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा वाचक साध्वी ऋतंभरा ने नारद मोह और राम जन्म की कथा सुनाई। कथा पंडाल में रामजन्म होते ही पुष्पवर्षा करते हुए श्रद्धालुओं ने नृत्य शुरू कर दिया। साध्वी ने कहा कि देवर्षि नारद ने तप शुरू किया तो देवराज इंद्र घबरा गए। इंद्र ने कामदेव को अप्सराओं के साथ उनकी तपस्या भंग करने को भेजा। अप्सराओं की कोशिश सफल नहीं हुई। कामदेव पर मिली जीत से नारद को अहंकार हो गया।
देवर्षि जब भगवान विष्णु के पास पहुंचे तो प्रभु ने उनके अहंकार को तोड़ने का निश्चय किया। राजा शीलनिधि की पुत्री विश्वमोहिनी के स्वयंवर में जाने के लिए देवर्षि नारद ने उनके समान रूप मांगा, लेकिन विश्वमोहिनी ने देवर्षि नारद के बजाय भगवान विष्णु से विवाह रचा लिया। इससे नारद का अहंकार टूट गया। तीसरे दिन की कथा में आयोजक सतेेंद्र चौहान, धौलाना से पूर्व विधायक धर्मेश तोमर, बुलंदशहर विभाग प्रचारक चंद्रशेखर, राजेश छौकर, संजय चौहान, ओमदत्त शर्मा, शैलेंद्र सिंह, त्रिलोकचंद शर्मा, यशपाल सिंह और चंद्रमणि भारद्वाज आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें